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अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया को रोका

अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी देश लाखों शरणार्थियों का खर्च नहीं उठा सकता। इस निर्णय के पीछे आर्थिक सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की रक्षा का तर्क है, लेकिन इसके वैश्विक राजनीति पर गहरे निहितार्थ हो सकते हैं। क्या यह कदम अमेरिका को मजबूत बनाएगा या उसे अलग थलग कर देगा? जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में।
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अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया को रोका

अमेरिका का नया आव्रजन निर्णय

अमेरिका ने अपनी आव्रजन नीति में एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद कदम उठाते हुए 75 देशों से आने वाले इमिग्रेंट वीजा की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। इस सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कई अन्य देश शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन देशों से आने वाले प्रवासी अमेरिकी संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं और उनके आगमन के तुरंत बाद ही वे सार्वजनिक बोझ बन जाते हैं।




यह निर्णय रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी देश लाखों शरणार्थियों की शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च नहीं उठा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगले महीने की पहली तारीख से अमेरिका किसी भी सैंक्चुअरी सिटी को वित्तीय सहायता नहीं देगा। फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक आंतरिक ज्ञापन में बताया गया है कि 21 जनवरी से 75 देशों के नागरिकों के लिए सभी प्रकार की वीजा प्रोसेसिंग रोक दी जाएगी। इस सूची में सोमालिया, रूस, ईरान, अफगानिस्तान, ब्राजील, नाइजीरिया और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।


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दूतावास और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए आवेदनों को अस्वीकार करें जब तक कि स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता। इस रोक की अवधि के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है। यह कदम दुनिया के लगभग दो सौ देशों में से एक तिहाई से अधिक देशों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद करने जैसा प्रतीत होता है।




अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि विभाग अपने दीर्घकालिक अधिकारों का उपयोग करते हुए ऐसे संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित करेगा जो अमेरिकी जनता की उदारता का दुरुपयोग कर सकते हैं। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त किया था और पिछले वर्ष आवेदकों के सोशल मीडिया खातों की जांच अनिवार्य कर दी थी। यह निर्णय उस व्यापक आव्रजन प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है जिसे ट्रंप ने पिछले वर्ष जनवरी में सत्ता संभालने के बाद तेज किया है। नवंबर में व्हाइट हाउस के पास एक गोलीबारी की घटना के बाद उन्होंने थर्ड वर्ल्ड देशों से आव्रजन को स्थायी रूप से रोकने की बात कही थी। इसके साथ ही सोमाली नागरिकों को मिलने वाली निर्वासन सुरक्षा भी समाप्त की जा रही है।




अमेरिका का यह निर्णय केवल एक आव्रजन नीति नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में बदलते संतुलन का संकेत भी है। ट्रंप प्रशासन इसे आर्थिक सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की रक्षा के नाम पर पेश कर रहा है, लेकिन इसके निहितार्थ कहीं अधिक गहरे हैं। 75 देशों पर एक साथ रोक लगाना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब वैश्वीकरण की अपनी पुरानी भूमिका से पीछे हटकर सख्त राष्ट्रकेंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।




सामरिक दृष्टि से, यह कदम अमेरिका की सॉफ्ट पावर को कमजोर कर सकता है। दशकों से अमेरिका दुनिया भर के प्रतिभाशाली युवाओं और कामगारों के लिए अवसर की भूमि रहा है। वीजा रोक से न केवल मानव पूंजी का प्रवाह रुकेगा, बल्कि उन देशों में अमेरिका के प्रति धारणा भी नकारात्मक होगी जिनके नागरिकों को सीधे निशाना बनाया गया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में पहले से ही चीन और रूस जैसे शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। ऐसे में अमेरिका का यह कदम प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के लिए कूटनीतिक अवसर खोल सकता है।




दूसरी ओर, घरेलू राजनीति में यह निर्णय ट्रंप के मूल समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देता है कि उनकी सरकार अमेरिकी करदाताओं के हितों को सर्वोपरि रखेगी। सार्वजनिक बोझ की दलील राजनीतिक रूप से प्रभावी हो सकती है, लेकिन इसका तथ्यात्मक आधार हमेशा विवाद के घेरे में रहा है। कई अध्ययनों ने दिखाया है कि प्रवासी लंबे समय में अर्थव्यवस्था में योगदान भी करते हैं।




भारत जैसे देशों के लिए यह निर्णय सीधे तौर पर लागू नहीं होता, लेकिन इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव अवश्य होंगे। वैश्विक आव्रजन सख्ती का रुझान अन्य पश्चिमी देशों को भी प्रभावित कर सकता है। साथ ही, दक्षिण एशिया में अस्थिरता और बेरोजगारी के दबाव और बढ़ सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।




बहरहाल, यह निर्णय अमेरिका की सामरिक सोच में आ रहे बदलाव को रेखांकित करता है, जहां आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण को वैश्विक नेतृत्व से ऊपर रखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह संकुचित दृष्टि लंबे समय में अमेरिका को मजबूत बनाएगी या उसे दुनिया में और अलग थलग कर देगी। यही इस निर्णय की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।