अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है और स्थिति जल्दी ठीक हो जाएगी। इस छूट का उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की कमी को रोकना है। जानें इस फैसले के पीछे के कारण और भारत के लिए इसका महत्व क्या है।
| Mar 8, 2026, 13:17 IST
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।
"हमारे पास पर्याप्त तेल है"
एयर फ़ोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सुरक्षा चिंताओं के कारण तेल की आपूर्ति में रुकावट का खतरा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या बाजार को स्थिर करने के लिए और कदम उठाए जाएंगे, तो उन्होंने कहा: "अगर बाजार पर दबाव कम करने के लिए कुछ करना पड़ा, तो मैं वह ज़रूर करूँगा। हालांकि, दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है। हमारे पास बहुत तेल है और स्थिति जल्दी ठीक हो जाएगी।"
छूट का विवरण
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई यह छूट विशेष रूप से उन रूसी कच्चे तेल के शिपमेंट के लिए है जो पहले से ही समुद्र में थे लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण फंस गए थे।
अवधि: यह छूट केवल 30 दिनों के लिए है।
उद्देश्य: वैश्विक बाजार में अचानक तेल की कमी और कीमतों में वृद्धि को रोकना।
रणनीति: 'फ्लोटिंग बैरल' को जल्दी से रिफाइनरी तक पहुँचाकर बाजार में सप्लाई जारी रखना।
भारत के लिए छूट का महत्व
इस छूट से भारत को उन रूसी तेल शिपमेंट को इंपोर्ट करने की अनुमति मिली है जो पहले से ही रास्ते में थे लेकिन अमेरिकी बैन के बाद फंस गए थे। अधिकारियों ने बताया कि यह उपाय 30 दिनों तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में अचानक कमी को रोकना है।
बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन ने पहले भारत से बैन किए गए रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने के लिए कहा था, लेकिन अब क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के कारण अस्थायी छूट दी गई है।
भारत और अमेरिका के बीच संबंध
बेसेंट ने वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है" और "यह अस्थायी उपाय ईरान की वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने की कोशिश से उत्पन्न दबाव को कम करेगा।"
हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने कहा कि देश क्रूड खरीदने के लिए बाहरी मंजूरी पर निर्भर नहीं है।
रूसी तेल पर भारत का रुख
भारत का रूसी क्रूड खरीदना अमेरिका और भारत के बीच तनाव का कारण बना है, जहां अमेरिका भारत पर आरोप लगाता रहा है कि वह यूक्रेन में पुतिन की लड़ाई को "ईंधन" दे रहा है।
भारत ने यह स्पष्ट किया है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद, रूसी तेल की खरीद उसकी नीति का हिस्सा है, जो देश के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
