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अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी, वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता का प्रयास

अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव के बीच रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाया गया है, जिसका उद्देश्य तेल की सप्लाई बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी जानें।
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अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी, वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता का प्रयास

अमेरिका का उद्देश्य: तेल की सप्लाई बढ़ाना


अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के चलते, ट्रंप प्रशासन ने अन्य देशों को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस संबंध में एक लाइसेंस जारी किया है।


इस लाइसेंस के तहत, उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की जा सकेगी, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड किए गए थे। यह छूट केवल 11 अप्रैल तक मान्य है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बढ़ाना है, ताकि कीमतों में कमी लाई जा सके।


ट्रम्प का लक्ष्य: ऊर्जा बाजार में स्थिरता

स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक अस्थायी निर्णय है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा। बेसेंट के अनुसार, रूस की आय का एक बड़ा हिस्सा तेल निकालने के समय लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद तेल के लिए है।


भारत की स्थिति: स्वतंत्रता से तेल खरीदने का अधिकार

अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात की थी। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है। इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।