अरविंद केजरीवाल ने हाई कोर्ट में पैरवी कर न्याय की मांग की
केजरीवाल की अनोखी पैरवी
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को राजनीति में कई विचारों के प्रवर्तक माना जाता है। उनके विचारों की गुणवत्ता पर बहस हो सकती है, लेकिन उन्होंने विचारधारा रहित राजनीति की नींव रखी है। केजरीवाल का मानना है कि गवर्नेंस अपने आप में एक विचारधारा है। उन्होंने उत्तर भारत में मुफ्त सेवाएं और वस्तुएं बांटने की परंपरा को स्थापित किया है। हाल ही में, विशेष अदालत द्वारा शराब नीति घोटाले को रद्द किए जाने के बाद, सीबीआई ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस मामले में, केजरीवाल ने स्वयं अपनी पैरवी की।
यह संभवतः पहली बार है जब किसी आरोपी नेता ने उच्च न्यायालय में जाकर जज से मुकदमे से हटने की अपील की। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से कहा कि उन्हें इस मामले से अलग हो जाना चाहिए। केजरीवाल ने जज के पूर्वाग्रह का आरोप लगाते हुए कहा कि जस्टिस शर्मा आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में चार बार गई हैं। इस कारण, उन्हें न्याय मिलने में संदेह है। इस तरह, केजरीवाल ने उन आलोचकों को भी जवाब दिया है, जो उन्हें आरएसएस और भाजपा की बी टीम मानते हैं।
