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अल-फलाह विश्वविद्यालय में धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा: ED ने जवाद अहमद सिद्दीकी को बनाया मुख्य आरोपी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मुख्य आरोपी बनाया है। जांच में यह सामने आया है कि विश्वविद्यालय ने कई फर्जी नियुक्तियाँ कीं और छात्रों को गुमराह किया। इसके अलावा, रेड फोर्ट बम धमाके के आरोपी को बिना पृष्ठभूमि जांच के नियुक्त किया गया। ED ने आरोप लगाया है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की सच्चाई।
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अल-फलाह विश्वविद्यालय में धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा: ED ने जवाद अहमद सिद्दीकी को बनाया मुख्य आरोपी

जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएँ


नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को मुख्य आरोपी के रूप में नामित करते हुए एक विस्तृत चार्जशीट प्रस्तुत की है। आरोपों के अनुसार, विश्वविद्यालय और इसके मेडिकल कॉलेज ने नियमों का उल्लंघन करते हुए व्यापक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की योजना बनाई। जांच में यह भी पाया गया कि विश्वविद्यालय ने कई नियुक्तियों में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया और 'ऑन-पेपर' कर्मचारियों को रखा।


फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति और धोखाधड़ी

फर्जी डॉक्टर और निरीक्षण में धोखाधड़ी
ED का दावा है कि विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई डॉक्टरों को केवल कागजों पर नियुक्त किया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई डॉक्टर वास्तव में कैंपस में कार्य नहीं करते थे। कुछ ने स्वीकार किया कि वे घर से काम कर रहे थे, जबकि यह फर्जी व्यवस्था मानक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत की गई थी। सभी नियुक्तियाँ HR विभाग की अनुशंसा के बाद सिद्दीकी की मंजूरी से हुईं, जिससे उनका सीधा नियंत्रण उजागर होता है।


रेड फोर्ट बम धमाके के आरोपी की नियुक्ति

बिना जांच के रेड फोर्ट बमधर्मी की नियुक्ति
सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि नवंबर 2025 के रेड फोर्ट ब्लास्ट के मुख्य आरोपी उमर उन नबी और उनके सहयोगियों को बिना पुलिस वेरिफिकेशन या पृष्ठभूमि जांच के विश्वविद्यालय में नियुक्त किया गया। HR हेड डॉ. जमील खान की सिफारिश के बाद यह नियुक्तियाँ हुईं और अंतिम मंजूरी सिद्दीकी ने दी।


फर्जी मरीजों का आयोजन

निरीक्षण के दौरान फर्जी मरीजों...
जांच में यह भी पता चला कि विश्वविद्यालय ने निरीक्षण के दौरान फर्जी मरीजों का आयोजन किया। IT हेड फरदीन बेग के अनुसार, यह कार्य PR ऑफिसर कमरान आलम और ASHA वर्कर्स के माध्यम से किया गया। सभी भुगतान रिकॉर्ड और दस्तावेज वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सत्यापित और अनुमोदित किए गए। निरीक्षण से पहले सीसीटीवी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष प्रबंध किया गया।


डिजिटल हेरफेर का मामला

डिजिटल और वेबसाइट में हेरफेर
ED का आरोप है कि NAAC की नोटिस के बाद विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर फर्जी जानकारी हटाने और बदलने का काम किया गया। यह निर्देश सीधे सिद्दीकी ने दिए थे और HR हेड डॉ. जमील खान ने इसका पालन कराया।


छात्रों को गुमराह करने के आरोप

छात्रों को गुमराह करना और NMC में धोखाधड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय ने छात्रों को अपनी वैधता और UGC/एनएमसी स्थिति के बारे में गुमराह किया। इसके आधार पर कई MBBS छात्रों से फीस ली गई। वहीं, चिकित्सा कॉलेज ने गरीबों के लिए मुफ्त उपचार और कल्याण सेवाओं का झूठा दावा करके NMC अनुमोदन प्राप्त किया।


अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का खुलासा

13 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए
ED ने व्हाट्सएप चैट और दस्तावेज़ों से पता लगाया कि 70 डॉक्टरों को ऑन-पेपर नियुक्तियों के लिए भुगतान किया गया। इसके अलावा 13.10 करोड़ रुपये विदेशी खातों में भेजे गए, जिन्हें सिद्दीकी या उनके परिवार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के जरिये ट्रांसफर किया गया।


सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला

सुनियोजित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग
ED का आरोप है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज़, अवैध नियुक्तियां और विदेशी फंड डायवर्जन का काम योजनाबद्ध तरीके से किया गया। जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्तियों, वित्त और निरीक्षण प्रबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाई। यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि नियोजित साजिश और केंद्रीय नियंत्रण का स्पष्ट उदाहरण है, जिससे छात्रों, नियामकों और अधिकारियों को गुमराह किया गया और वित्तीय संसाधनों को भारत से बाहर भेजा गया।