असम की राजनीति में हलचल: एआईयूडीएफ ने तीन नेताओं को किया निलंबित
असम में चुनावी माहौल गरमाया
असम की राजनीतिक स्थिति विधानसभा चुनावों के आगमन के साथ ही तेजी से बदल रही है। इस बीच, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त पाए गए अपने दो विधायकों समेत तीन नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे असम गण परिषद में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
निलंबित नेताओं की पहचान
निलंबित नेताओं में अब्दुल अजीज, सहबुल इस्लाम चौधरी और करीम उद्दीन बरभुइया शामिल हैं। करीम उद्दीन बरभुइया पार्टी के उपाध्यक्ष थे और श्रीभूमि विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि अब्दुल अजीज बदरपुर से विधायक हैं।
पार्टी के नेतृत्व का कहना है कि इन नेताओं की गतिविधियां संगठन के हितों के खिलाफ थीं, जिसके कारण उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया।
राज्यसभा चुनाव पर राजनीतिक चर्चाएं
इस घटनाक्रम के साथ ही असम की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी हलचल बढ़ गई है। आरोप है कि एआईयूडीएफ के कुछ नेताओं ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार प्रमोद बोरो के समर्थन में नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर कांग्रेस ने एआईयूडीएफ पर सवाल उठाए हैं।
गौरव गोगोई का बयान
असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्यसभा चुनाव के लिए एआईयूडीएफ से समर्थन मांगा है। गोगोई का कहना है कि यह भाजपा की सत्ता-केन्द्रित राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा एआईयूडीएफ को खतरा मानती है, तो फिर अपने उम्मीदवार की जीत के लिए उसी पार्टी का समर्थन क्यों मांगा जा रहा है।
कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस मुद्दे पर एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। एआईयूडीएफ का कहना है कि उसने कई मौकों पर कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन कांग्रेस ने बदले में सहयोग नहीं किया।
एआईयूडीएफ विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा कि राज्यसभा की तीन सीटें खाली थीं और दोनों दल मिलकर तीसरी सीट के लिए साझा उम्मीदवार उतार सकते थे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कांग्रेस नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
असम की राजनीति में नए समीकरण
इस घटनाक्रम के बाद असम की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है, खासकर जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
