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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ साजिश की चर्चा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। सरमा ने आरोपों का सामना करते हुए दिल्ली में पुलिस को भेजा, जबकि खेड़ा ने अग्रिम जमानत प्राप्त की। इस बीच, भाजपा के भीतर से सरमा के खिलाफ साजिश की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। क्या यह चुनाव पर असर डालेगा? जानें पूरी कहानी में।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ साजिश की चर्चा

पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके परिणाम

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मतदान से दो दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उनके बयान काफी नुकसानदायक साबित हुए। सरमा ने साहस के साथ इन आरोपों का सामना किया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार, उन्होंने 24 घंटे के भीतर दिल्ली में पुलिस को भेज दिया। पवन खेड़ा को इस बात का अनुभव है, क्योंकि पहले भी असम पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली आई थी, लेकिन भारी ड्रामे के बाद उन्हें हवाईअड्डे से बचाया गया था। इसलिए, वे असम पुलिस के आने से पहले हैदराबाद चले गए। वहां की अदालत में उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसमें उन्हें राहत भी मिली।


इस घटना के साथ ही दिल्ली में दो प्रकार की चर्चाएँ शुरू हुईं। एक चर्चा कांग्रेस के भीतर थी, जिसमें यह कहा गया कि पार्टी के महासचिवों और राज्यसभा सीट के दावेदारों ने पवन खेड़ा को अकेला छोड़ दिया। हालांकि, बाद में अभिषेक सिंघवी ने उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करने का प्रयास किया। लेकिन दूसरी चर्चा इस बात पर थी कि क्या हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ पार्टी के भीतर से कोई साजिश की गई है।


साजिश की संभावनाएँ और चुनाव पर प्रभाव

इस बात की चर्चा तेजी से फैल रही है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने मिलकर हिमंत बिस्वा सरमा का कद कम करने की योजना बनाई। चुनाव से ठीक पहले उनकी पत्नी के तीन पासपोर्ट और अमेरिका के वायोमिंग में 52 हजार करोड़ रुपये की कंपनी के दस्तावेज पवन खेड़ा को उपलब्ध कराए गए। कहा जा रहा है कि इन दस्तावेजों की सच्चाई का पता बाद में चलेगा, लेकिन चुनाव पर इसका प्रभाव निश्चित रूप से पड़ेगा। इससे सरमा की आक्रामक शैली पर असर पड़ा है और वे बैकफुट पर आ गए हैं।


हालांकि, यदि वे चुनाव जीत जाते हैं, तो उनके खिलाफ साजिश करने वालों को बड़ा झटका लगेगा। इसके अलावा, अगला कदम यह बताया जा रहा है कि छवि को बिगाड़ने का उद्देश्य केवल चुनाव में कमजोर करना नहीं है, बल्कि चुनाव के बाद एक दागदार छवि वाले नेता को कैसे मुख्यमंत्री बनाया जाए, इस पर नैरेटिव तैयार करना है। ध्यान रहे कि पिछली बार सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में चुनाव हुआ था और सरमा मुख्यमंत्री बने थे।