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असम में जनगणना के बाद असमिया अल्पसंख्यक होने का डर

असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने चेतावनी दी है कि अगली जनगणना में असमिया लोग अल्पसंख्यक बन सकते हैं। यह बयान कई सवाल उठाता है, खासकर जब पिछले एक दशक से राज्य में डबल इंजन की सरकार है। क्या भाजपा को असमिया वोटों के कांग्रेस की ओर जाने का डर है? जानें इस मुद्दे की गहराई और राजनीतिक समीकरणों को।
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असम में जनगणना के बाद असमिया अल्पसंख्यक होने का डर

मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा का बयान

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने असम के निवासियों को एक चिंताजनक स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अगली जनगणना में असमिया लोग अल्पसंख्यक बन सकते हैं। यह सवाल उठता है कि ऐसा कैसे संभव है? 2011 की जनगणना में असमिया लोग अल्पसंख्यक नहीं थे, तो अब ऐसा क्यों होगा? यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछले एक दशक से राज्य में डबल इंजन की सरकार है। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार पिछले 12 वर्षों से है, और असम में पहले सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री रहे, जिनके कार्यकाल में हिमंत बिस्वा सरमा मंत्री थे। अब सरमा खुद मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने घुसपैठियों को बाहर निकालने का दावा किया है।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर सरमा की प्रशंसा करते हैं। सवाल यह है कि जब डबल इंजन की सरकार ने घुसपैठ को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, तो असमिया लोग अल्पसंख्यक कैसे बन सकते हैं? यह स्पष्ट है कि या तो यह दावा गलत है या भाजपा को इस बात की चिंता है कि असमिया वोट कांग्रेस की ओर जा सकता है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई अहोम समुदाय से हैं और उन्होंने दो क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इन पार्टियों के नेता भी अहोम संस्कृति की रक्षा के लिए सक्रिय हैं।