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असम में भाजपा का सहयोगी बदलने का खेल: यूपीपीएल की स्थिति पर सवाल

असम में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी यूपीपीएल को छोड़कर बीपीएफ के साथ गठबंधन करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बदलाव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने कहा कि 10 मार्च तक गठबंधन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपीपीएल अब क्या कदम उठाती है। क्या वह अकेले चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस के साथ गठबंधन की ओर देखेगी? बोडोलैंड क्षेत्र में इस राजनीतिक बदलाव का क्या असर होगा, जानें इस लेख में।
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असम में भाजपा का सहयोगी बदलने का खेल: यूपीपीएल की स्थिति पर सवाल

भाजपा का असम में सहयोगी बदलने का निर्णय

भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टियों को बदलने की प्रवृत्ति का एक उदाहरण असम में देखने को मिला है। हाल ही में, भाजपा ने पिछले चुनाव में अपने सहयोगी यूपीपीएल को छोड़ने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से इस विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। उन्होंने केवल यह कहा कि 10 मार्च तक गठबंधन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।


सरमा ने मीडिया को बताया कि असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ सीट बंटवारे की चर्चा की जाएगी, जो कि 10 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। जब उनसे यूपीपीएल के भविष्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।


यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रमोद बोडो की पार्टी यूपीपीएल के साथ गठबंधन किया था। इससे पहले, भाजपा का तालमेल हाग्रामा मोहिलारी की पार्टी बीपीएफ के साथ था। जब यूपीपीएल ने बोडोलैंड टेरिटोरियल कौंसिल का चुनाव जीता, तब भाजपा ने बीपीएफ को छोड़कर यूपीपीएल के साथ हाथ मिलाया। अब, जब बीपीएफ ने इस बार बीटीसी का चुनाव जीत लिया है, भाजपा ने यूपीपीएल को छोड़कर बीपीएफ के साथ फिर से गठबंधन किया है।


यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपीपीएल अब क्या कदम उठाती है। क्या वह अकेले चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस के साथ गठबंधन की ओर देखेगी? बोडोलैंड क्षेत्र में मोहिलारी और बोडो का प्रभाव है, और वहां की 15 विधानसभा सीटें दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।