असम में सुखोई-30 विमान दुर्घटना: भारतीय वायुसेना ने दो पायलट खोए
भारतीय वायुसेना का दुखद क्षण
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपने दो बहादुर पायलटों को खो दिया है। असम के कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में सुखोई-30 एमकेआई विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर ने वीरगति को प्राप्त किया। विमान का रडार संपर्क जोरहाट से उड़ान भरने के कुछ समय बाद टूट गया था। पूर्वेश दुरगकर 'ऑपरेशन सिंदूर' का हिस्सा थे, और उनके पिता रवींद्र दुरगकर को गर्व है कि उनके बेटे ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
दुर्घटना का विवरण
सुखोई-30 एमकेआई विमान एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। शाम करीब 7.42 बजे, जोरहाट से उड़ान भरने के बाद, विमान का रडार से संपर्क टूट गया। यह विमान जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी इलाके में गिर गया। खोज के बाद, दोनों पायलटों की शहादत की आधिकारिक पुष्टि की गई।
पूर्वेश का परिवार और उनकी विरासत
नागपुर से संबंध
शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर नागपुर के न्यू सूबेदार लेआउट के निवासी थे। उनके पिता रवींद्र दुरगकर रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। बचपन से ही पूर्वेश का सपना आसमान छूने और फाइटर जेट उड़ाने का था। वे अपनी ड्यूटी को लेकर बहुत गंभीर थे और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में अपनी काबिलियत साबित कर चुके थे.
परिवार में अंतिम मुलाकात
दस दिन पहले, पूर्वेश के घर में खुशियों का माहौल था। उनकी बहन, जो अमेरिका में रहती हैं और आईआईटी की छात्रा हैं, घर आई थीं। पूरे परिवार ने एक साथ गेट-टुगेदर किया था। रवींद्र दुरगकर को याद है कि बुधवार को उनकी पूर्वेश से आखिरी बात हुई थी। किसी ने नहीं सोचा था कि यह अंतिम मुलाकात होगी.
श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री की संवेदनाएं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर दोनों पायलटों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर के साहस और राष्ट्र सेवा को हमेशा गर्व और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा। इस दुखद घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है.
कर्तव्य और गौरव की दास्तां तेजपुर में रनवे के काम के कारण पूर्वेश वर्तमान में जोरहाट में तैनात थे। वे अक्सर अपने पिता से काम की बातें साझा करते थे। रवींद्र दुरगकर अपनी आंखों में आंसू लिए बताते हैं कि उनका बेटा एक समर्पित अधिकारी था। पूर्वेश की शहादत ने देश को एक बहादुर योद्धा के जाने का गम दिया है, लेकिन उनकी वीरता प्रेरणा बनी रहेगी.
