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असम विधानसभा चुनाव: कांग्रेस की रणनीतियाँ और भाजपा की चुनौतियाँ

असम में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के बीच की जंग दिलचस्प मोड़ ले रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा की 10 साल की सत्ता ने उसे असम में अलोकप्रिय बना दिया है। इस बार कांग्रेस ने बदरूद्दीन अजमल की पार्टी से गठबंधन नहीं किया है, जिससे ध्रुवीकरण की संभावना कम हुई है। भाजपा के लिए सीएए और घुसपैठियों का मुद्दा चुनौती बन गया है। जानें कैसे ये चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और किस पार्टी को मिलेगा फायदा।
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असम विधानसभा चुनाव: कांग्रेस की रणनीतियाँ और भाजपा की चुनौतियाँ

असम में चुनावी परिदृश्य

अप्रैल में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, जिनमें से कांग्रेस के लिए केरल और असम महत्वपूर्ण हैं। पार्टी को विश्वास है कि भाजपा की 10 साल की सत्ता ने उसे असम में अलोकप्रिय बना दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विवादास्पद भाषणों और विभाजनकारी राजनीति से लोग थक चुके हैं। लेकिन क्या यह सच है? यह सही है कि एंटी इन्कम्बैंसी का असर है और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के कारण असम के लोग नाराज हैं। फिर भी, पिछले चुनावों में ध्रुवीकरण की जो स्थिति बनी है, वह कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस बार कांग्रेस ने बदरूद्दीन अजमल की पार्टी से गठबंधन नहीं किया है, जिससे ध्रुवीकरण की संभावना थोड़ी कम हुई है।


संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का प्रभाव

भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सीएए के कार्यान्वयन को रोक दिया था, क्योंकि उसे इसके संभावित नुकसान का एहसास हो गया था। सीएए 2019 में पारित हुआ था, लेकिन इसके लागू करने के नियम नहीं बनाए गए। 2021 के चुनाव में भाजपा को असम में इसका लाभ मिला, जबकि पश्चिम बंगाल में नुकसान हुआ। अब, पश्चिम बंगाल में लाभ के लिए सीएए को लागू किया गया है, लेकिन असम में इसके नकारात्मक प्रभाव की आशंका है। असम में यह धारणा है कि सीएए से बांग्ला बोलने वाली जनसंख्या बढ़ेगी, जिससे असमिया भाषा और संस्कृति कमजोर होगी।


कांग्रेस की चुनावी रणनीति

कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई, जो अहोम वंश से संबंधित हैं, असमिया संस्कृति और भाषा के मुद्दों को उठाते रहते हैं। पार्टी ने सीएए का विरोध करने वाले समूहों से गठबंधन किया है और भाजपा के धार्मिक ध्रुवीकरण के मुकाबले भाषा और पहचान के आधार पर ध्रुवीकरण की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा की अध्यक्षता में एक छंटनी समिति बनाई है, जो दर्शाता है कि पार्टी असम में अपनी स्थिति को लेकर आश्वस्त है।


गठबंधन और चुनावी समीकरण

कांग्रेस ने पिछले चुनाव में महाजोत गठबंधन बनाया था, जिसमें कई पार्टियाँ शामिल थीं। इस बार, कांग्रेस ने असोम सम्मिलितो मोर्चा बनाया है, जिसमें पहले की तरह सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई माले शामिल हैं। हालांकि, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और अजमल की पार्टी इस बार कांग्रेस के साथ नहीं हैं। कांग्रेस ने विभिन्न जातीय समूहों में प्रभाव रखने वाली छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है।


पिछले चुनावों का विश्लेषण

पिछले चुनाव में एनडीए और महाजोत के बीच बहुत करीबी मुकाबला हुआ था। एनडीए को 44.51% वोट मिले, जबकि महाजोत को 43.68% वोट मिले। हालांकि, सीटों में बड़ा अंतर आया। यह भारत के 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' प्रणाली की खामी है। कांग्रेस के नेता मानते हैं कि मुस्लिम समुदाय पहले से ही उनके साथ है, इसलिए उन्होंने अजमल की पार्टी से गठबंधन नहीं किया।


भाजपा की चुनौतियाँ

हिमंत बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई को निशाना बनाते हुए उनके परिवार के बारे में विवादास्पद टिप्पणियाँ की हैं। भाजपा का मुख्य मुद्दा घुसपैठियों को बाहर निकालना है, लेकिन इस बार असमिया संस्कृति का मुद्दा कांग्रेस और उसकी सहयोगियों ने उठाया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यह चुनावी माहौल उसके पक्ष में जाएगा।