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आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का भाजपा में विलय, दिल्ली की राजनीति में हलचल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ ला दिया है। इस घटनाक्रम ने भाजपा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 113 कर दिया है। सांसदों ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया क्योंकि वे आप के कथित अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। जानें इस विलय के पीछे की वजह और एंटी-डिफेक्शन कानून का क्या प्रभाव है।
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आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का भाजपा में विलय, दिल्ली की राजनीति में हलचल

दिल्ली में राजनीतिक हलचल


नई दिल्ली में राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल को पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। राज्यसभा के सभापति ने इस विलय को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है, और राज्यसभा सचिवालय ने भी इसकी पुष्टि की है। अब ये सांसद भाजपा के सदस्यों के रूप में दर्ज हो चुके हैं, जिससे दिल्ली की राजनीति में नया मोड़ आया है।


सात सांसदों का भाजपा में शामिल होना

आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। इन सभी ने भाजपा मुख्यालय जाकर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और वरिष्ठ नेता तरुण चुघ की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।


भाजपा की सदस्य संख्या में वृद्धि

इस विलय के बाद राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 113 हो गई है। इससे पहले, इन सांसदों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद भाजपा में शामिल हो रहे हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि वे पार्टी के कथित अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।


एंटी-डिफेक्शन कानून का प्रावधान

संविधान की दसवीं अनुसूची में शामिल एंटी-डिफेक्शन कानून का उद्देश्य सांसदों को पार्टी बदलने से रोकना है। हालांकि, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय का निर्णय लेते हैं, तो इसे डिफेक्शन नहीं माना जाता। इसी प्रावधान के तहत इन सात सांसदों को अयोग्य ठहराए जाने से बचाया गया है और उनका विलय वैध माना गया है।