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आरबीआई की नीलामी: राज्यों को 18,159 करोड़ रुपये का कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अप्रैल 2026 को विभिन्न राज्य सरकारों के लिए 18,159 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की योजना की घोषणा की है। इस नीलामी में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्य शामिल होंगे। इसके अलावा, ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार के बारे में भी जानकारी दी गई है। जानें इस महत्वपूर्ण नीलामी के सभी पहलुओं के बारे में।
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आरबीआई की नीलामी: राज्यों को 18,159 करोड़ रुपये का कर्ज

राज्यों के लिए कर्ज जुटाने की प्रक्रिया


इस नीलामी में कई राज्य मिलकर उठाएंगे 18,159 करोड़ का कर्ज


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 7 अप्रैल 2026 को विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के माध्यम से 18,159 करोड़ रुपये जुटाने की योजना की घोषणा की है। यह नीलामी आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जाएगी, जिसमें नई और री-इश्यू दोनों प्रकार की प्रतिभूतियां शामिल होंगी। आंध्र प्रदेश 2,200 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र 3,600 करोड़ रुपये, राजस्थान 3,600 करोड़ रुपये और तेलंगाना 3,900 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बना रहे हैं।


इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मेघालय भी इस नीलामी में भाग लेंगे। नीलामी के परिणाम 7 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे, और सफल बोलीदाताओं को 8 अप्रैल को भुगतान करना होगा। रिटेल निवेशक भी आरबीआई के रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से इसमें भाग ले सकते हैं।


ब्याज दरों में संभावित वृद्धि

मार्च में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल रहने के कारण अर्थशास्त्रियों का मानना है कि हम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। अगले बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा होने वाली है, और बाजार में इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि क्या आरबीआई रुपये की रक्षा के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करेगा। हालांकि, एचएसबीसी की रिपोर्ट ने इस कदम के जोखिमों के प्रति चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रुपये की रक्षा के लिए ब्याज दरों का उपयोग करना बहुत महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ विकास में गिरावट तेजी से बढ़ सकती है।


भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल और गैस की कमी को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में आपूर्ति से संबंधित चुनौतियों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है, जिसमें ईरान से आयात भी शामिल है।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी कच्चे तेल के भुगतान में कोई बाधा नहीं है, जैसा कि कुछ अफवाहों में कहा जा रहा है। सरकार ने दोहराया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की आवश्यकताएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और आपूर्ति को लेकर कोई चिंता नहीं है।