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आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा, आर्थिक स्थिरता का प्रयास

भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2026 के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा की है, जिसमें रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंक दर और अन्य दरें भी यथावत रहेंगी। उन्होंने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत लगाया है, लेकिन वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चेतावनी भी दी है। इस निर्णय का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा, आर्थिक स्थिरता का प्रयास

आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 के लिए मौद्रिक नीति के निर्णय की घोषणा की है, जिसमें रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। इस बार भी दरों में कोई बदलाव की संभावना जताई जा रही थी। मौजूदा रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। यह निर्णय बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप है और छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने दो दिनों की चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी। आरबीआई का यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।


आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि बैंक दर और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) की दर 5.50 प्रतिशत पर यथावत रखी गई है, जबकि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) की दर भी 5.00 प्रतिशत पर बनी रहेगी। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक आर्थिक हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।


गवर्नर ने 2025 को एक चुनौतीपूर्ण वर्ष बताया, लेकिन यह भी कहा कि अक्टूबर की नीति के बाद से मुद्रास्फीति में कमी आई है। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली की बेहतर कार्यकुशलता को अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बताया। उल्लेखनीय है कि यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना और भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिली।


आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भारत की विकास दर पर दबाव डाल सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी कारक भारत की आर्थिक गति के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।