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इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम: अमेरिका की पहल से मिली सफलता

इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा अमेरिका की पहल पर हुई है। यह 10 दिनों का युद्धविराम स्थायी सुरक्षा और शांति समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत ने इस निर्णय का स्वागत किया है। जानें इस स्थिति पर इजराइल में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ और क्या है आगे की रणनीति।
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इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम: अमेरिका की पहल से मिली सफलता

युद्धविराम की घोषणा

नई दिल्ली। ईरान पर हमले के दो दिन बाद, इजराइल ने दो मार्च को लेबनान पर हमले की शुरुआत की थी। अब, दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू हो गया है। अमेरिका की मध्यस्थता से, इजराइल और लेबनान ने शुक्रवार से 10 दिनों के लिए युद्धविराम पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य स्थायी सुरक्षा और शांति समझौते की वार्ता को आगे बढ़ाना है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार रहेगा, लेकिन वह लेबनान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा, चाहे वह जमीन, हवा या समुद्र से हो।


सीजफायर के बाद की स्थिति

इजराइल और लेबनान के बीच सीजफायर के बाद, ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को खोलने की घोषणा की। हालांकि, सीजफायर के बाद लेबनान पर दबाव है कि वह हिजबुल्ला के हमलों को रोकने के लिए कदम उठाए। दूसरी ओर, इजराइल में इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कई लोग इस फैसले से असंतुष्ट हैं। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, यदि चुनाव आज होते हैं, तो नेतन्याहू की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है, जो युद्धविराम के प्रति नाराजगी को दर्शाता है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने इजराइल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम सीजफायर का स्वागत करते हैं। शांति की दिशा में उठाए गए हर कदम का स्वागत है।'