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इजराइल का लेबनान पर हमला: संघर्षविराम की धज्जियां उड़ाई

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद, इजराइल ने लेबनान पर एक विनाशकारी हमला किया। इस हमले में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। इजराइल ने इसे हिजबुल्ला के खिलाफ एक बड़ा कदम बताया, जबकि हिजबुल्ला और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे युद्ध अपराध करार दिया। ईरान और चीन ने भी इस हमले की निंदा की है। जानिए इस जटिल स्थिति के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम।
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इजराइल का लेबनान पर हमला: संघर्षविराम की धज्जियां उड़ाई

इजराइल का ताजा हमला

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद, इजराइल ने लेबनान पर एक विनाशकारी हमला किया, जिसने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया। यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि क्षेत्र में शांति की कोई उम्मीद नहीं बची है। इजराइली सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने हिजबुल्ला के प्रमुख नईम कासिम के करीबी सहयोगी अली यूसुफ हरशी को मार गिराया है। हरशी कासिम के दफ्तर की सुरक्षा और संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसके अलावा, इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हथियारों के ठिकानों, लॉन्चर और कमांड सेंटर पर भी बड़े पैमाने पर हमले किए।


बेरूत में तबाही

बेरूत और उसके आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर अचानक बमबारी शुरू होने के बाद स्थिति भयावह हो गई। लेबनान के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार, इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। अस्पतालों में अफरा-तफरी मच गई, एंबुलेंस घायलों को ले जाने में व्यस्त रहीं, और सड़कों पर चीख-पुकार सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विस्फोटों की तीव्रता ने पूरे शहर को हिला दिया। लोग अपनी गाड़ियों को छोड़कर भागते नजर आए, बच्चे रोते हुए सड़कों पर दौड़ रहे थे, और चारों ओर धुएं के गुबार छाए हुए थे।


इजराइल का बयान

इजराइल के रक्षा मंत्री ने इसे अब तक का सबसे बड़ा समन्वित हमला बताया और कहा कि सैकड़ों हिजबुल्ला लड़ाकों को निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्ला के ढांचे को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए की गई। हालांकि, इजराइली सेना ने यह भी दावा किया कि उसने नागरिकों को नुकसान से बचाने की कोशिश की, लेकिन जमीन पर दिख रही तबाही इन दावों को खोखला साबित करती है।


हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया

हिजबुल्ला ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, इसे नागरिक इलाकों पर हमला बताते हुए। लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने इसे खुला युद्ध अपराध करार दिया। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, यह कहते हुए कि इस तरह की कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।


संघर्षविराम का उल्लंघन

इस बीच, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा हो चुकी थी, तब यह हमला क्यों हुआ? पाकिस्तान ने कहा था कि यह समझौता पूरे क्षेत्र पर लागू होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।


ईरान और चीन की प्रतिक्रिया

ईरान ने इस हमले को संघर्षविराम का गंभीर उल्लंघन बताया है और इसे नरसंहार करार दिया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह इजराइल की पुरानी रणनीति है, जिसमें पहले संघर्षविराम का पालन किया जाता है और फिर अचानक हमला किया जाता है। चीन ने भी इस हमले की निंदा की है, यह कहते हुए कि लेबनान की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।


इजराइल का लक्ष्य

इजराइल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्ला को पूरी तरह समाप्त करना है। उसने कहा है कि जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं होता, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी। दूसरी ओर, लेबनान सरकार अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगा रही है।


भारत में इजरायली राजदूत का बयान

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के बावजूद, तेल अवीव पाकिस्तान को एक 'विश्वसनीय पक्ष' के रूप में नहीं देखता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने निजी स्वार्थों के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता का सहारा लिया है।