इजरायल के पीएम नेतन्याहू का ईरान पर बड़ा बयान, अमेरिका-ईरान वार्ता विफल
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों की सफलता का दावा किया है, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। नेतन्याहू ने ईरान को घेरने की कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि अब स्थिति बदल चुकी है। अमेरिका ने ईरान को वार्ता की विफलता का जिम्मेदार ठहराया, जबकि ईरान ने अमेरिका की मांगों को अनुचित बताया। इस स्थिति के चलते क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
| Apr 12, 2026, 14:58 IST
नेतन्याहू का बयान
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के असफल होने के बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियानों को सफल बताते हुए कहा कि इजरायल ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
नेतन्याहू की कड़ी प्रतिक्रिया
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने हमास, हिजबुल्लाह, हूती और अन्य आतंकवादी समूहों के माध्यम से इजरायल को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा, 'ईरान हमें खत्म करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब हम उन्हें कमजोर कर रहे हैं। जो देश हमें खत्म करने की धमकी देता था, वह अब खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सब 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ और यह अभियान अभी भी जारी है।
अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया
रविवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस विफलता के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'अमेरिका अपनी 'रेड लाइन्स' पर अडिग है और ईरान ने शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। वार्ता का विफल होना अमेरिका से कहीं अधिक ईरान के लिए नकारात्मक है। कोई समझौता न होने के कारण अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट रहा है।'
ईरान ने अमेरिका को दोषी ठहराया
वहीं, ईरान ने बातचीत के टूटने का पूरा दोष अमेरिका पर लगाया है। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने शांति के लिए कई प्रस्ताव पेश किए थे, लेकिन अमेरिका की 'अनुचित मांगों' और अड़ियल रुख के कारण वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस विफलता के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
