Newzfatafatlogo

इस्लाम की जटिलताएँ: ईद और मध्य पूर्व की राजनीति

इस लेख में इस्लाम की विविधता और ईद के संदर्भ में मध्य पूर्व की राजनीति की जटिलताओं पर चर्चा की गई है। विभिन्न इस्लामी समूहों की भूमिका, सऊदी अरब और इज़राइल के बीच के संबंध, और ईरान के साथ संभावित संघर्ष पर विचार किया गया है। क्या यह ईद वास्तव में ऐतिहासिक होगी? जानने के लिए पढ़ें।
 | 
इस्लाम की जटिलताएँ: ईद और मध्य पूर्व की राजनीति

इस्लाम की विविधता और राजनीतिक संदर्भ

इस्लाम के विभिन्न समूह, चाहे वे शिया हों या सुन्नी, देवबंदी या बरेलवी, कश्मीर के अब्दुल्ला-मेहबूबा-इंजीनियर हों या हैदराबाद के ओवैसी, सभी एक ही धागे में बंधे हैं। मलेशिया और खाड़ी देशों में छिपे जाकिर नाईक से लेकर दाऊद तक, ये सभी अपने-अपने तरीके से इस्लाम के सवा दो अरब अनुयायियों को प्रभावित कर रहे हैं। यह संदेश फैलाया जा रहा है कि अल्लाह ने अपनी पवित्र भूमि में रेत से अधिक धन बिखेरा है। कुछ दशक पहले भारत में ट्रकों के नीचे 'इराक का पानी' लिखा मिलता था, जो इस विचार को दर्शाता है।


इस सदी के 9/11 से लेकर 28 फरवरी 2026 या 23 अक्टूबर 2023 तक की घटनाओं पर विचार करें। पिछले ढाई दशकों का सार क्या है?


भारत में मुसलमानों के प्रमुख विचारक डॉ. जाकिर नाईक का कहना होगा कि यह सब खुदा की योजना है। लेकिन मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने हाल ही में क्या कहा? उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव गरिमा का हवाला देते हुए इज़राइल के अल अक्सा मस्जिद को नमाज़ के लिए बंद करने की शिकायत की।


यह मस्जिद इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो मक्का और मदीना के समान पवित्र है। यह इस्लाम के प्रारंभिक दिनों में पहली क़िबला थी। इस ईद पर, सऊदी अरब और अन्य अरब देशों की भूमिका पर विचार करें, जो कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं।


क्या यह ईद विडंबनाओं से भरी नहीं है? क्या खाड़ी के शेख और किंग ईद के बाद ईरान पर हमले की योजना बना रहे हैं?


भारत के मुसलमानों ने बाबर की मस्जिद के लिए आवाज उठाई, जबकि इज़राइल अल अक्सा मस्जिद और सऊदी अरब मक्का-मदीना की पवित्रता को नजरअंदाज कर रहा है। सऊदी अरब और खाड़ी देशों ने मुसलमानों को भटकाने का काम किया है।


मैं यहूदी-इज़राइल समर्थक रहा हूं, क्योंकि प्राचीन धर्म के अनुयायियों को उनकी भूमि पर अधिकार मिलना चाहिए। इज़राइल का अस्तित्व गलत नहीं था, लेकिन अरब देशों ने उससे लड़ाई छेड़ी। अब, मेरा मानना है कि नेतन्याहू इस ईद के बाद ग्रेटर इज़राइल के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।


लेकिन इससे पहले, ईरान और खाड़ी देशों के बीच सीधी लड़ाई की संभावना है। क्या कोई इस ऐतिहासिक ईद को भुला सकता है?