ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: पाकिस्तान की मध्यस्थता पर चर्चा
कूटनीतिक हलचल में तेजी
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इस संदर्भ में, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में बातचीत से इनकार करने की खबरों को खारिज किया है और पाकिस्तान के शांति प्रयासों की सराहना की है।
अराघची का स्पष्टीकरण
सैयद अब्बास अराघची ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान का रुख बातचीत की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसी संदर्भ में, शनिवार रात को अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के साथ फोन पर विस्तृत चर्चा की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिति पर विचार किया और भविष्य में संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। इशाक डार ने कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर विवाद
Iran's position is being misrepresented by U.S. media.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 4, 2026
We are deeply grateful to Pakistan for its efforts and have never refused to go to Islamabad. What we care about are the terms of a conclusive and lasting END to the illegal war that is imposed on us.
پاکستان زنده باد pic.twitter.com/AUjBQxOFyA
बातचीत से पहले, सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी मीडिया ईरान के रुख को गलत तरीके से पेश कर रहा है। अराघची ने कहा कि ईरान ने कभी भी इस्लामाबाद जाने से मना नहीं किया और वह पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए आभारी है।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि ईरान अंतिम समय में इस्लामाबाद वार्ता से पीछे हट गया है। इन अटकलों को खारिज करते हुए, ईरानी विदेश मंत्री ने सफाई दी, जिस पर इशाक डार ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
इजरायल का सख्त रुख
जहां एक ओर ईरान और पाकिस्तान बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इजरायल ने इस मध्यस्थता पर भरोसा करने से साफ इनकार कर दिया है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि उनका देश ऐसे किसी राष्ट्र पर विश्वास नहीं करेगा, जिसके साथ उसके कूटनीतिक संबंध नहीं हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है और इस मामले में वह केवल अमेरिका के रुख पर भरोसा करता है। इजरायल का यह कड़ा रुख क्षेत्रीय कूटनीति की जटिलता को और बढ़ा देता है।
