ईरान और भारत के बीच बढ़ती कूटनीतिक बातचीत: क्या है मामला?
ईरान के साथ तनावपूर्ण स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामकता और अस्थिरता को देखते हुए, ईरान पर संभावित हमले की आशंका बढ़ गई है। अगले 24 से 48 घंटों में मिसाइलों की बौछार और एक बड़ा सैन्य अभियान संभव है। इस बीच, ईरान भी चुप नहीं है और उसने अपनी मिसाइलों को तैयार कर लिया है। लेकिन इस तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटना हुई है जिसने वैश्विक ध्यान भारत की ओर खींचा है। ईरान ने भारत के विदेश मंत्री, डॉक्टर एस जयशंकर से सीधे संपर्क किया है। यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने भारत से बात की है।
ईरान और भारत के बीच बातचीत का महत्व
ईरान के विदेश मंत्री ने डॉक्टर एस जयशंकर को फोन किया है, और यह बातचीत सामान्य नहीं है। पिछले 47 दिनों से चल रहे तनाव के बीच यह दोनों नेताओं के बीच छठी बार संवाद हो रहा है। ईरान लगातार भारत से संपर्क में है और सभी विवरण साझा किए जा रहे हैं। इस कॉल में पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति, युद्ध के प्रभाव और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई। लेकिन सवाल यह है कि ईरान भारत से क्या चाहता है? संकेत स्पष्ट हैं। भारत एक तटस्थ और विश्वसनीय देश है, जिसके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध हैं।
भारत की भूमिका और ऊर्जा सुरक्षा
भारत केवल एक दर्शक नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया उसके लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज़, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, संकट में पड़ सकता है। यदि स्थिति बिगड़ती है, तो भारत की तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है। इसलिए, भारत इस स्थिति पर सक्रिय है और कूटनीति कर रहा है। कतर के प्रधानमंत्री, यूएई के विदेश मंत्री और ईरान के साथ लगातार बातचीत जारी है।
