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ईरान का अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला, कई सैनिक घायल

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है, जब ईरान ने अमेरिका के हवाई हमलों का जवाब देते हुए एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, और अमेरिका के दो महत्वपूर्ण 'MQ-9 रीपर' ड्रोन भी नष्ट हो गए हैं। ईरान की IRGC ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ गया है। जानें इस हमले के पीछे की वजह और अमेरिका का संभावित जवाब क्या हो सकता है।
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ईरान का अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला, कई सैनिक घायल

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव: ईरान का जवाबी हमला

वॉशिंगटन से एक महत्वपूर्ण खबर आई है, जिसमें बताया गया है कि ईरान ने अमेरिका के हालिया हवाई हमलों का प्रतिशोध लेते हुए एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन से हमला किया है। इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।


इसके अलावा, अमेरिकी वायुसेना के दो प्रमुख 'MQ-9 रीपर ड्रोन' को भी नुकसान पहुंचा है। इस हमले के बाद, दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच का युद्धविराम अब खतरे में पड़ गया है, और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है।


ईरान की IRGC ने हमले की जिम्मेदारी ली

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक बयान जारी किया है। IRGC ने कहा कि उनके बलों ने उस अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया, जहां से ईरान के दक्षिणी हिस्से में बमबारी की गई थी। ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा में की गई थी।


कुवैत में अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमला

अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की है। पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने कुवैत में स्थित 'अली अल सलेम एयर बेस' पर 'फतेह-110' बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। हालांकि, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इस मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा एयर बेस पर गिरने से कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए।


अमेरिका को हुआ बड़ा आर्थिक नुकसान

इस हमले में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है। एयर बेस पर हुए धमाके से दो 'MQ-9 रीपर' ड्रोन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनमें से एक ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया है, जबकि दूसरा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इन ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर है, और उनका नष्ट होना अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है।