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ईरान की शर्तें: अमेरिका की स्वीकार्यता पर पूर्व राजनयिक का दृष्टिकोण

पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करने की ईरान की अनिच्छा और ट्रंप के विरोधाभासी बयानों पर चर्चा की। सोनी का मानना है कि ईरान अपनी शर्तों पर बातचीत करेगा और अपने स्वाभिमान का सौदा नहीं करेगा। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके और क्या विचार हैं।
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ईरान की शर्तें: अमेरिका की स्वीकार्यता पर पूर्व राजनयिक का दृष्टिकोण

पूर्व राजनयिक का बयान

नई दिल्ली। विद्या भूषण सोनी, जो एक पूर्व राजनयिक हैं, ने कहा है कि ईरान द्वारा अमेरिका की निर्धारित शर्तों को मानने की संभावना बहुत कम है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों को विरोधाभासी बताते हुए इसे एक व्यापक वार्ता की रणनीति का हिस्सा माना। ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान डील के लिए भीख मांग रहा है, सोनी ने कहा कि यह एक अद्भुत स्थिति है। उन्होंने ट्रंप की कैबिनेट के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि वह हैरान थे कि राष्ट्रपति एक ही बयान में अपने ही विचारों का खंडन कैसे कर सकते हैं। एक ओर वह ईरान को बातचीत के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें धमकी भी दे रहे हैं।


सोनी ने आगे कहा कि अमेरिका ईरान पर अपनी शर्तें थोप नहीं सकता। ईरान अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेगा। भले ही उन्हें नुकसान उठाना पड़े या अपनी सुविधाओं पर हमले सहने पड़ें, वे अपने स्वाभिमान का सौदा नहीं करेंगे। ईरान एक गर्वित राष्ट्र है, जिसके पीछे एक समृद्ध इतिहास और संस्कृति है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष फिलहाल अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं। ट्रंप अपनी शर्तें रख सकते हैं, लेकिन ईरान भी अपनी शर्तें प्रस्तुत करेगा। बातचीत की जटिलताओं को समझाते हुए, सोनी ने कहा कि वार्ता का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच एक ऐसा मुद्दा खोजना है जो स्वीकार्य हो। इसका मतलब है कि इसमें लेन-देन होगा, जो दोनों पक्षों की ओर से होगा। उन्होंने इस प्रक्रिया को औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले स्थितियों के चरणबद्ध आदान-प्रदान के रूप में वर्णित किया। इसलिए, वर्तमान में दोनों पक्ष अपनी प्रारंभिक स्थिति प्रस्तुत कर रहे हैं।