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ईरान की सैन्य क्षमताओं में तेजी से सुधार, अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

हालिया अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से बहाल कर रहा है, जो कि अमेरिका और इजराइल के लिए चिंता का विषय है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपने ड्रोन उत्पादन को फिर से शुरू कर दिया है और लगभग 66% मिसाइल लांचर्स को सुरक्षित रखा है। रूस और चीन की सहायता से, ईरान कुछ महीनों में अपनी सैन्य ताकत को पुनः प्राप्त करने की स्थिति में आ गया है। जानें इस स्थिति के संभावित परिणाम और ईरान का भविष्य में क्या खतरा हो सकता है।
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ईरान की सैन्य क्षमताओं में तेजी से सुधार, अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

ईरान की सैन्य ताकत में तेजी से सुधार

हाल ही में अमेरिका और इजराइल के बीच हुए तीव्र हवाई हमलों के बाद यह कहा गया था कि ईरान का सैन्य ढांचा पूरी तरह से नष्ट हो गया है और इसे पुनर्निर्माण में कई साल लगेंगे। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई और गुप्त रिपोर्ट ने इन दावों को खारिज कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में हुए युद्ध विराम का लाभ उठाते हुए ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से पुनर्स्थापित कर रहा है। इसने वाशिंगटन और यरूशलम में सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपने सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बावजूद बहुत कम समय में ड्रोन उत्पादन को फिर से शुरू कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेस्टिक मिसाइलों की तुलना में ड्रोन निर्माण को नष्ट करना अधिक कठिन है, क्योंकि इसके लिए विशाल ढांचे की आवश्यकता नहीं होती। इसे छोटे और छिपे हुए स्थानों से भी किया जा सकता है। 


ईरान की ड्रोन क्षमता में तेजी से वृद्धि

अनुमान है कि ईरान अगले कुछ महीनों में अपनी पूरी ड्रोन हमलावर क्षमता को फिर से प्राप्त कर लेगा। इसके अलावा, अमेरिकी और इजराइली बमबारी के बावजूद, ईरान अपने लगभग 66% मिसाइल लांचर्स को सुरक्षित रखने में सफल रहा है। उसकी भूमिगत मिसाइल सिटीज और सुरंगें भी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जहां मिसाइल साइटों और हथियार निर्माण फैक्ट्रियों को युद्ध स्तर पर फिर से तैयार किया जा रहा है। ईरान की इस अप्रत्याशित गति के पीछे रूस और चीन की गुप्त रणनीतिक सहायता को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद, चीन लगातार ईरान को ऐसे संवेदनशील उपकरण और घटक प्रदान कर रहा है जो मिसाइल और ड्रोन निर्माण के लिए आवश्यक हैं। वहीं, रूस के साथ ईरान का बढ़ता सैन्य सहयोग उसे इस संकट से उबरने में तकनीकी और ढांचागत मजबूती दे रहा है। 


अमेरिकी अधिकारियों की चिंताएं

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसी विदेशी सहायता के चलते ईरान कुछ महीनों में अपनी सैन्य ताकत को फिर से हासिल करने की स्थिति में आ गया है। इस नई रिपोर्ट ने अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले यह दावा किया था कि हमलों ने ईरान के लगभग 90% डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को नष्ट कर दिया है और वह लंबे समय के लिए कमजोर हो गया है। लेकिन वास्तविकता इन दावों के विपरीत है, जो यह दर्शाता है कि ईरान का रक्षा तंत्र अत्यंत लचीला है। वर्तमान में चल रहा छह हफ्तों का युद्ध विराम अब समाप्त होने के कगार पर है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान शांति समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका फिर से हमले शुरू कर सकता है। लेकिन इस नई खुफिया रिपोर्ट का सीधा अर्थ यह है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान पूरी तरह से असहाय नहीं होगा, बल्कि उसके पास पहले से ही मिसाइलों और अत्याधुनिक ड्रोन का एक बड़ा भंडार होगा। सुरक्षित बचे लांचरों और नए ड्रोन के साथ, ईरान अब भी इजराइल और खाड़ी देशों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।