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ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीतियों पर IRGC की प्रतिक्रिया

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप प्रशासन की ऊर्जा प्रबंधन रणनीति को असफल करार दिया है। IRGC का कहना है कि अमेरिका ने अवरोध उत्पन्न करने की रणनीति अपनाई है, जिससे ईरान अब 'अवरोध के खिलाफ गठबंधन' का केंद्र बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान पर लंबी नाकेबंदी की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य उसे परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करना है। इस बीच, गैस की कीमतों में वृद्धि ट्रंप की लोकप्रियता को प्रभावित कर रही है।
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ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीतियों पर IRGC की प्रतिक्रिया

IRGC की चेतावनी

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यह स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक ऊर्जा प्रबंधन की रणनीति को छोड़कर अवरोध उत्पन्न करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप, ईरान अब 'अवरोध के खिलाफ गठबंधन' का मुख्य केंद्र बन गया है। IRGC के अनुसार, अमेरिका ने चीन, रूस और यूरोप को नियंत्रित करने के लिए यह अवरोध परियोजना शुरू की थी।


अमेरिकी रणनीति में बदलाव

IRGC ने एक पोस्ट में बताया कि ट्रंप प्रशासन ने 'दुनिया की ऊर्जा का प्रबंधन' करने के बजाय 'अवरोध' उत्पन्न करने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत एक समुद्री नाकेबंदी भी लागू की गई थी। हालांकि, 20 दिनों के भीतर व्हाइट हाउस में यह धारणा बन रही है कि यह योजना असफल हो चुकी है।


नए सैन्य ऑपरेशन्स की तैयारी

इससे पहले, एक मीडिया चैनल ने रिपोर्ट किया था कि CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर, राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान में संभावित सैन्य ऑपरेशन्स के बारे में जानकारी देने वाले हैं।


ईरान पर नाकेबंदी का प्रभाव

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान की लंबी नाकेबंदी की तैयारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम ईरान को परमाणु हथियारों को छोड़ने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसे ईरान ने हमेशा से अस्वीकार किया है।


गैस की कीमतों में वृद्धि

ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए उसके बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही को रोकने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि अन्य विकल्प, जैसे बमबारी या संघर्ष से पीछे हटना, नाकेबंदी के मुकाबले अधिक जोखिम भरे हैं।


राजनीतिक दबाव

ट्रंप को यह चिंता सता रही है कि मध्यावधि चुनावों के नजदीक आने पर उनका जनसमर्थन कमजोर हो सकता है। हाल ही में गैस की कीमतों में वृद्धि ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया है।