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ईरान के खिलाफ युद्ध की समयसीमा: ट्रंप की चुनौतियाँ और कांग्रेस की भूमिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त करने की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है। यदि यह समयसीमा समाप्त होती है, तो ट्रंप को कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई जारी रखने में कठिनाई हो सकती है। जानें इस जटिल स्थिति में ट्रंप और कांग्रेस की संभावित प्रतिक्रियाएँ क्या हो सकती हैं।
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ईरान के खिलाफ युद्ध की समयसीमा: ट्रंप की चुनौतियाँ और कांग्रेस की भूमिका

ईरान के खिलाफ युद्ध की समयसीमा का संकट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को समाप्त करने की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है। यदि यह समयसीमा पार होती है, तो यह अमेरिकी कानून का उल्लंघन माना जाएगा।


1973 के ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ के अनुसार, राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के केवल 60 दिनों तक युद्ध कर सकते हैं। इसके बाद, या तो कांग्रेस को युद्ध की घोषणा करनी होती है या राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी पड़ती है।


वर्तमान स्थिति और संभावित परिणाम

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के लिए तैनात अमेरिकी नौसेना पर यह कानून लागू होगा। यदि 60 दिनों की समयसीमा समाप्त हो जाती है और ट्रंप पीछे हटने से इनकार करते हैं, तो स्थिति क्या होगी?


‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ को नवंबर 1973 में कांग्रेस द्वारा पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति के युद्ध घोषित करने के अधिकार को सीमित करना था। यह कानून वियतनाम युद्ध के बाद लाया गया था, लेकिन इसके प्रभावी होने में कई खामियाँ रही हैं।


कानून की धाराएँ और ट्रंप की स्थिति

इस कानून की धारा चार के अनुसार, राष्ट्रपति को अमेरिकी सैनिकों को युद्ध में शामिल करने के 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को रिपोर्ट देना अनिवार्य है। इसके बाद, धारा पांच के तहत 60 दिनों की समयसीमा शुरू होती है। यदि इस अवधि में कांग्रेस युद्ध को मंजूरी नहीं देती, तो राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी होगी।


ट्रंप ने दो मार्च को ईरान युद्ध पर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपी थी, जिसमें बताया गया कि 60 दिनों की समयसीमा एक मई को समाप्त हो रही है। हालांकि, कांग्रेस ने अब तक युद्ध को मंजूरी नहीं दी है।


रिपब्लिकन सांसदों की चिंताएँ

ईरान के खिलाफ यह युद्ध ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 34 प्रतिशत अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन करते हैं। कई सांसद अपने मतदाताओं की राय को लेकर चिंतित हैं और ट्रंप का विरोध करने में संकोच नहीं कर रहे हैं।


यदि 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिलती, तो कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने कहा है कि वे इस युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे। ट्रंप के लिए यह स्थिति और भी जटिल हो सकती है।


कांग्रेस की संभावित प्रतिक्रिया

डेमोक्रेट्स प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अतीत में ऐसा करना कठिन साबित हुआ है। ट्रंप यह भी तर्क दे सकते हैं कि यह कानून लागू नहीं होता, क्योंकि अमेरिकी बल फिलहाल ईरान में प्रत्यक्ष लड़ाई में शामिल नहीं हैं।


यदि ट्रंप समयसीमा की अनदेखी करते हैं, तो आगे की स्थिति कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।


भविष्य की संभावनाएँ

यदि एक मई तक अमेरिकी सैनिक पश्चिम एशिया में तैनात रहते हैं, तो ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ पिछले 50 वर्षों में पहली बार वास्तविक रूप से प्रभावी साबित हो सकता है। ट्रंप को इस अलोकप्रिय युद्ध का सामना करना पड़ सकता है, जबकि कांग्रेस में उनका बहुमत भी कम है।