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ईरान के मिसाइल हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका का खुलासा

हाल ही में ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका का खुलासा हुआ है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने चीन से एक स्पाई सेटेलाइट खरीदी थी, जिसने हमले की योजना बनाने में मदद की। इस रिपोर्ट ने ईरान के हमलों के पीछे की तकनीकी सहायता को उजागर किया है, जिससे अमेरिका को भारी नुकसान हुआ। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है।
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ईरान के मिसाइल हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका का खुलासा

ईरान के हमलों का रहस्य

हाल ही में, जब ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए, तो पूरी दुनिया हैरान रह गई। सवाल उठने लगे कि ईरान को इतनी सटीक जानकारी कैसे मिली? अब एक नई रिपोर्ट ने इस रहस्य को उजागर किया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुछ साल पहले चीन से एक सेटेलाइट खरीदी थी। इस सेटेलाइट का नाम TE01 है, जिसे चीन की एक कंपनी अर्थ आई द्वारा विकसित किया गया था। हालांकि यह एक व्यावसायिक सौदा प्रतीत होता है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है। लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि इस सेटेलाइट का नियंत्रण ईरान की सिविलियन स्पेस एजेंसी के पास नहीं, बल्कि आईआरजीसी के पास था। इस खबर के सामने आने के बाद, ईरान के हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका पर चर्चा शुरू हो गई है।


हमले की योजना और परिणाम

मार्च 2026 में, जब ईरान ने अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला किया, तो सेटेलाइट ने हमले से 24 घंटे पहले सटीक तस्वीरें भेजी थीं। हमले के बाद हुए नुकसान की जानकारी भी इसी सेटेलाइट ने दी। इस प्रकार, चीनी तकनीक ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन गई। अमेरिका के लिए यह जानना आवश्यक है कि इस हमले में उसे कितना नुकसान हुआ। अमेरिका ने पुष्टि की है कि उनके फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ, जिसमें F-15 ई स्ट्राइक ईगल और A10 थंडरबोल्ट जैसे विमानों का गिरना शामिल है।


चीनी सेटेलाइट की निगरानी

ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने एक अमेरिकी F-35 को गिराया है। हालांकि, भारत ने इस नुकसान की पुष्टि नहीं की है। आमतौर पर युद्ध के दौरान दोनों पक्षों को नुकसान होता है, लेकिन अमेरिका को जो नुकसान हुआ, वह अपेक्षित नहीं था। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेटेलाइट ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की तस्वीरें ली थीं। 14 मार्च को, ट्रंप ने भी इस बेस पर अमेरिकी विमानों को हुए नुकसान की पुष्टि की थी। इसके अलावा, सेटेलाइट ने जॉर्डन, बहरीन, इराक और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी ठिकानों की निगरानी की। यह अमेरिका की इंटेलिजेंस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।