ईरान ने अमेरिका से बातचीत की संभावना को किया खारिज
ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही यह दावा कर रहे हों कि वे ईरान में नए नेतृत्व से संवाद कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने इस बात से साफ इनकार किया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ उनकी कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। इसके साथ ही, ईरान ने यह भी बताया कि पाकिस्तान किसी मध्यस्थ के रूप में कार्य नहीं कर रहा है। मुंबई में ईरान के वाणिज्य दूत ने कहा कि पाकिस्तान का प्रयास केवल उसका अपना है, जिसमें ईरान की कोई भागीदारी नहीं है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच केवल मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उसकी शर्तें तर्कहीन हैं। बघाई ने कहा कि ईरान का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदलता रहा है। ईरान ने यह भी कहा कि उसे पूरी तरह से पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत पर विचार करेगा।
पाकिस्तान में चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि यह उनकी अपनी पहल है और तेहरान इसमें शामिल नहीं हुआ। ईरान ने मध्य पूर्व के देशों से युद्ध समाप्त करने की कोशिश करने का आग्रह किया, लेकिन यह भी याद दिलाया कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी। मुंबई में ईरानी वाणिज्य दूतावास ने बताया कि ईरान पाकिस्तान द्वारा की जा रही किसी भी मध्यस्थता का हिस्सा नहीं है। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले पाकिस्तान में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी।
इस बीच, यूरोपीय संघ ने ईरान पर मानवाधिकार से जुड़े प्रतिबंधों को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अब ये प्रतिबंध 13 अप्रैल 2027 तक लागू रहेंगे। यूरोपीय संघ ने कहा है कि जिन व्यक्तियों और संस्थाओं पर ये प्रतिबंध लगाए गए हैं, वे यूरोप के देशों में यात्रा नहीं कर सकेंगे और उनकी संपत्तियां भी जब्त या फ्रीज रहेंगी। इसके अलावा, ईरान को ऐसे उपकरण भेजने पर भी रोक लगाई जाएगी, जिनका उपयोग लोगों पर नजर रखने या उन्हें दबाने के लिए किया जा सकता है।
