ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की नई सैन्य रणनीतियाँ
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ता
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हालात फिर से तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर गोपनीय जानकारी दी गई है। यह जानकारी एक प्रमुख समाचार पत्र ने अमेरिकी प्रशासन के कई अधिकारियों के हवाले से साझा की है। यह ब्रीफिंग ऐसे समय में हुई है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिनका प्रभाव देश के बाहर भी महसूस किया जा रहा है.
ईरान में प्रदर्शन और उनकी वजहें
ईरान में ये प्रदर्शन दिसंबर के अंत से शुरू हुए, जिनका कारण मुद्रा संकट, महंगाई और जीवनयापन की कठिनाइयाँ बताई जा रही हैं। धीरे-धीरे ये आंदोलन केवल आर्थिक असंतोष तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि ईरान की धार्मिक सत्ता के खिलाफ एक चुनौती बन गए हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इंटरनेट पर भी रोक लगाई गई है.
ईरान के सर्वोच्च नेता का कड़ा रुख
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने किसी भी नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। एक समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा बलों को सख्ती से निपटने का निर्देश दिया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को 'ईश्वर का दुश्मन' मानकर कठोर सजा दी जा सकती है, जो कि ईरानी कानून के तहत मौत की सजा तक हो सकती है.
विरोध प्रदर्शनों का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
इन प्रदर्शनों में कुछ स्थानों पर ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में नारे भी सुनाई दे रहे हैं। उनके बेटे रजा पहलवी ने विदेश में रह रहे ईरानियों से अपील की है कि वे सड़कों पर डटे रहें। ईरान की सीमाओं के बाहर भी इसका असर देखा जा रहा है। लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुराने 'लायन एंड सन' झंडे को फहराया गया, जबकि पेरिस, बर्लिन और वॉशिंगटन में भी एकजुटता रैलियाँ आयोजित की गई हैं.
अमेरिका की प्रतिक्रिया
वॉशिंगटन से चेतावनी भरे बयान जारी किए जा रहे हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यदि ईरानी प्रशासन ने हिंसा बढ़ाई, तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं, हालांकि जमीनी सेना भेजने से इनकार किया गया है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका ईरानी जनता के साथ खड़ा है.
अमेरिकी विदेश मंत्री की बातचीत
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की है, जिसमें ईरान की स्थिति पर चर्चा की गई। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है, ताकि सरकार पर दबाव बना रहे, लेकिन आम जनता का रुख शासन के पक्ष में न जाए.
भविष्य की संभावनाएँ
लगभग छह महीने पहले अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर 'मिडनाइट हैमर' नाम से हमला किया था, जिसके बाद हालात और संवेदनशील हो गए थे। अब जब तेहरान की सड़कों पर फिर से विरोध के नारे गूंज रहे हैं, तो व्हाइट हाउस का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरानी नेतृत्व प्रदर्शनकारियों को दबाने में कितनी दूर तक जाने को तैयार है.
