उद्धव ठाकरे का भावनात्मक संदेश: BMC चुनाव हारने के बाद भी नहीं देंगे हार
उद्धव ठाकरे का सियासी संदेश
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में सत्ता खोने के एक दिन बाद, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को एक भावुक और राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर बने और यह भी जोड़ा कि, "अगर भगवान ने चाहा, तो यह सपना पूरा होगा।"
BJP पर सीधा हमला
उद्धव ठाकरे का यह बयान उस समय आया है जब BMC में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे ठाकरे परिवार का 25 साल पुराना प्रभाव समाप्त हो गया है। BMC को देश की सबसे धनी नगर निगम माना जाता है और यह लंबे समय से शिवसेना की ताकत का प्रतीक रही है।
अपने संबोधन में, ठाकरे ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि भाजपा ने चुनाव "विश्वासघात के माध्यम से जीते" हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की नजर अब मुंबई को "गिरवी रखने" पर है। ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस प्रकार की राजनीति को मराठी मानूस कभी नहीं माफ करेगा.
हम पीछे हटने वाले नहीं
Mumbai: Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray says, "There is a clear difference between the BJP and us. Shiv Sena may have been targeted on paper, but no one can erase it from the hearts of the people. Betrayers can be bought through money, pressure, agencies and tactics, but… pic.twitter.com/iMnocuSjh8
— News Media (@news_media) January 17, 2026
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि BMC केवल एक नगर निगम नहीं है, बल्कि यह मुंबई की पहचान और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उद्धव ठाकरे ने यह भी संकेत दिया कि चुनावी हार के बावजूद उनकी पार्टी पीछे हटने का इरादा नहीं रखती और भविष्य में पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
BMC में हार का प्रभाव
BMC शिवसेना के लिए केवल सत्ता का केंद्र नहीं था, बल्कि यह संगठन को मजबूत बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण आधार भी था। यहां से पार्टी को राजनीतिक प्रभाव, संसाधन और प्रशासनिक पकड़ मिलती थी। अब इस पकड़ के छूटने को शिवसेना (UBT) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हालांकि, उद्धव ठाकरे के बयान से यह स्पष्ट है कि वे इस हार को अंतिम नहीं मानते। "Sena-UBT का मेयर" बनने की बात के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं में हौसला बनाए रखने की कोशिश की है। उनका संदेश यह भी दर्शाता है कि वे आगे की राजनीति में मराठी अस्मिता और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर भाजपा को चुनौती देने के लिए तैयार हैं।
