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उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव में भाग लेने से किया इनकार

उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव में भाग लेने से इनकार कर दिया है, जिससे कांग्रेस और एनसीपी में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कांग्रेस ने ठाकरे के इस निर्णय को धोखा मानते हुए 12 मई को होने वाले चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। इस स्थिति से विपक्ष को मिलने वाली एकमात्र सीट भी खतरे में पड़ सकती है। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी।
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उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव में भाग लेने से किया इनकार

उद्धव ठाकरे का निर्णय

उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद के चुनाव में भाग लेने से मना कर दिया है। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने व्यक्तिगत रूप से उनसे अनुरोध किया था कि वे विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद में शामिल हों। इसके अलावा, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी यही बात कही थी। लेकिन उद्धव ने खुद विधान परिषद में जाने के बजाय अपनी पार्टी के नेता अंबादास दानवे को उम्मीदवार के रूप में नामित किया है। यह निर्णय कांग्रेस और एनसीपी दोनों के लिए अप्रिय है, और दोनों पार्टियों ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया है। खासकर कांग्रेस इस स्थिति से नाराज है।


कांग्रेस की प्रतिक्रिया

एनसीपी को इस निर्णय से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उद्धव ठाकरे ने पहले शरद पवार को राज्यसभा भेजने में समर्थन दिया था। इसलिए उनकी पार्टी उद्धव की पसंद का सम्मान करेगी। हालांकि, कांग्रेस को यह महसूस हो रहा है कि उसके साथ धोखा हुआ है। कांग्रेस ने राज्यसभा में शरद पवार को समर्थन दिया और विधान परिषद में उद्धव को समर्थन देने का आश्वासन दिया था। यदि उद्धव चुनाव में नहीं जाते हैं, तो कांग्रेस का कहना है कि इस सीट पर उसका भी दावा है। इसी कारण कांग्रेस 12 मई को होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। यदि कांग्रेस बिना सहमति के उम्मीदवार खड़ा करती है, तो विपक्ष को मिलने वाली एकमात्र सीट भी उसके हाथ से निकल सकती है। उद्धव के उम्मीदवार को वापस लेने की संभावना कम है, जिससे संकट उत्पन्न हो गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य में विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव होने वाले हैं, जिनमें से चार भाजपा के पास, दो शिवसेना और एनसीपी के पास जाएंगी, और एक सीट विपक्ष को मिलेगी।