एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के कॉल डिटेल्स से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
राजनीति में उथल-पुथल
नई दिल्ली: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बाबा अशोक खरात के बीच कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के लीक होने से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया के आरोपों के बाद विपक्ष ने महायुति सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। यह मामला न केवल सत्ता और विवादित व्यक्तियों के बीच संभावित संबंधों पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी जांच एजेंसियों की गोपनीयता बनाए रखने की क्षमता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अशोक खरात पर गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने बताया कि शिंदे और खरात के बीच कम से कम 17 बार बातचीत हुई थी। यह संवेदनशील जानकारी एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से प्राप्त हुई। इस घटना ने डेटा सुरक्षा और पुलिस जांच की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि सरकारी जांच की जानकारी इस तरह से लीक होती है, तो जनता का व्यवस्था पर विश्वास उठ जाएगा।
अशोक खरात के खिलाफ आपराधिक मामले
बाबा अशोक खरात पर एक महिला के साथ तीन साल तक दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने उन्हें 18 मार्च को गिरफ्तार किया था, और जांच के दौरान यौन शोषण और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे कई अन्य गंभीर अपराध भी सामने आए हैं। अब तक खरात के खिलाफ कुल आठ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए सवाल उठाया कि क्या महायुति प्रशासन निजी राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के गोपनीय सबूत जानबूझकर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए लीक किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने महिलाओं के वायरल वीडियो को लेकर भी जांच एजेंसी पर सवाल उठाए हैं।
जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग
महाराष्ट्र में इस राजनीतिक संकट के बीच जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि यदि जांच एजेंसियां डेटा को सुरक्षित नहीं रख सकतीं, तो यह राज्य के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह मामला केवल कुछ फोन कॉल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी न्याय प्रणाली की शुचिता का सवाल है। आने वाले दिनों में यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़े उथल-पुथल का संकेत दे सकता है, जिससे महायुति सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
