Newzfatafatlogo

एच-1बी वीजा में वेतन वृद्धि का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव

अमेरिका में एच-1बी वीजा के लिए न्यूनतम वेतन में वृद्धि का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों पर पड़ सकता है। नए नियम के तहत, कंपनियों को विदेशी श्रमिकों को पहले से अधिक वेतन देने की आवश्यकता होगी। इस प्रस्ताव पर 26 मई तक सार्वजनिक सुझाव मांगे जा रहे हैं। यदि यह नियम लागू होता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। जानें इस प्रस्ताव के समर्थन और आलोचना के बारे में।
 | 
एच-1बी वीजा में वेतन वृद्धि का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव

एच-1बी वीजा में प्रस्तावित वेतन वृद्धि

अमेरिका में एच-1बी वीजा से संबंधित एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की घोषणा की गई है, जिसका प्रभाव भारतीय पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों पर पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि यह कदम अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।


नए नियम का प्रस्ताव और सुझाव प्रक्रिया

हालिया जानकारी के अनुसार, अमेरिकी श्रम विभाग ने 27 मार्च को इस नए नियम का प्रस्ताव पेश किया था। इस पर 26 मई तक सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियों की मांग की जा रही है। यदि यह नियम लागू होता है, तो कंपनियों को विदेशी श्रमिकों को पहले से अधिक वेतन देने की आवश्यकता होगी।


वेतन श्रेणियों में प्रस्तावित वृद्धि

प्रस्तावित नियम के अनुसार, चार अलग-अलग वेतन श्रेणियों में लगभग 20 से 33 प्रतिशत तक वृद्धि की बात की गई है। वर्तमान में शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वार्षिक वेतन 73,279 डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 97,746 डॉलर करने का सुझाव दिया गया है। इसी तरह, दूसरे स्तर का वेतन 98,987 डॉलर से बढ़ाकर 1,23,212 डॉलर किया जा सकता है।


वेतन सीमा में बदलाव

तीसरे स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन सीमा 1,21,979 डॉलर से बढ़कर 1,47,333 डॉलर और चौथे स्तर के लिए 1,44,202 डॉलर से बढ़ाकर 1,75,464 डॉलर करने का प्रस्ताव है। हालांकि, विभिन्न शहरों में वेतन मानकों में भिन्नता हो सकती है।


नियमों का व्यापक प्रभाव

यह बदलाव केवल एच-1बी वीजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एच-1बी1, ई-3 और स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रमों पर भी लागू हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि मौजूदा वेतन ढांचा लगभग 20 साल पुराना है और इसमें समय के अनुसार बदलाव नहीं किया गया है। इसके कारण कंपनियां विदेशी श्रमिकों को अमेरिकी श्रमिकों की तुलना में कम वेतन पर नियुक्त कर रही थीं।


समर्थन और आलोचना

इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे वेतन प्रणाली अधिक संतुलित होगी और अमेरिकी श्रमिकों के हित सुरक्षित रहेंगे। वहीं, आलोचकों का मानना है कि छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों के लिए विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करना कठिन हो जाएगा, विशेषकर शुरुआती पदों पर।


पिछले प्रयास और वर्तमान प्रक्रिया

इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2020 में वेतन नियमों में बदलाव की कोशिश की थी, लेकिन कानूनी चुनौतियों के कारण उस निर्णय को वापस लेना पड़ा था। इस बार सरकार सार्वजनिक सुझाव प्रक्रिया का पालन कर रही है ताकि नियम को कानूनी मजबूती मिल सके।


अंतर्राष्ट्रीय शुल्क और प्रभाव

इसके अतिरिक्त, सितंबर 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने अमेरिका से बाहर मौजूद एच-1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डॉलर का शुल्क भी लगाया था। उसी आदेश के तहत श्रम विभाग को वेतन मानकों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।


भारतीय कंपनियों पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है, तो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे कंपनियां जो कम लागत पर विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करती हैं, उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।