ओडिशा में यूरिया संकट: नवीन पटनायक ने केंद्र से की मदद की अपील

ओडिशा में किसानों की समस्याएं बढ़ी
ओडिशा में यूरिया की कमी के चलते किसानों के बीच चिंता बढ़ गई है, जिससे राजनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है।
पटनायक ने पत्र में उल्लेख किया कि कृषि ओडिशा की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, जो राज्य की 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या की आजीविका का साधन है। पिछले 20 वर्षों में ओडिशा ने कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
एक समय धान का आयातक रहा ओडिशा अब देश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का एक प्रमुख योगदानकर्ता बन चुका है। यह उपलब्धि आधुनिक तकनीक और कृषि इनपुट की उपलब्धता के कारण संभव हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान में खरीफ सीजन चल रहा है और यूरिया की कमी से किसान काफी परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के दावों के बावजूद, किसानों तक खाद नहीं पहुंच रही है।
पटनायक ने अपने पत्र में लिखा कि 7.94 लाख टन यूरिया का भंडारण होने का दावा किया गया है, लेकिन किसान यूरिया के लिए तरस रहे हैं। राज्यभर में यूरिया की कालाबाजारी और मिलावट की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। किसानों को सरकारी मूल्य से अधिक दाम चुकाकर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। कई आदिवासी जिलों में किसान आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
नवीन पटनायक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'मार्कफेड', जो सरकारी वितरण एजेंसी है, खाद को सीधे किसानों को देने के बजाय निजी व्यापारियों को सप्लाई कर रही है। इससे बिचौलियों को लाभ हो रहा है और किसान ठगे जा रहे हैं।
पत्र में पटनायक ने तालचेर उर्वरक संयंत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 2018 में शिलान्यास के समय यह वादा किया गया था कि संयंत्र 36 महीनों में चालू होगा, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। इससे राज्य के किसानों की उम्मीदें टूट गई हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि खाद की कालाबाजारी और मिलावट पर तुरंत नकेल कसी जाए। दोषी डीलरों और सहकारी समितियों से जुड़े अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। खरीफ सीजन में समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जाए ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।