ओवैसी का बीजेपी पर तीखा हमला: चीन, ट्रंप और मुस्लिम युवाओं की कैद पर सवाल
नई दिल्ली में ओवैसी का बयान
नई दिल्ली: AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक बयान देकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। रविवार को जालना नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की राष्ट्रवादी छवि पर गंभीर सवाल उठाए। ओवैसी ने सुरक्षा मुद्दों, चीनी निवेश और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
चीन और ऑपरेशन सिंदूर पर ओवैसी की चुनौती
ओवैसी ने आरोप लगाया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत सैन्य उपकरण चीन से आते हैं। ओवैसी ने सवाल उठाया, "जब चीन हमारे दुश्मन को सैन्य सहायता दे रहा है, तो भारत सरकार चीनी कंपनियों को निवेश के लिए क्यों आमंत्रित कर रही है? यह किस प्रकार का राष्ट्रवाद है?"
डोनाल्ड ट्रंप के अपमान पर चुप्पी
ओवैसी ने ट्रंप द्वारा भारत पर की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप बार-बार भारत का मजाक उड़ा रहे हैं, लेकिन बीजेपी इस पर चुप है। उन्होंने पूछा कि जब विदेशी शक्तियां भारत का अपमान करती हैं, तो बीजेपी का राष्ट्रवाद कहां चला जाता है।
शेख हसीना पर सवाल उठाते हुए
ओवैसी ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के निर्णय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर भारतीय मुसलमानों को बांग्लादेशी कहकर अपमानित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर सरकार खुद हसीना को पनाह दे रही है।
मुस्लिम युवाओं की लंबी कैद पर चिंता
इसके अलावा, ओवैसी ने बिना मुकदमे के मुस्लिम युवाओं की लंबी कैद पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जमानत से इनकार करना संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। ओवैसी ने छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की निरंतर कैद के लिए कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया, यह कहते हुए कि कांग्रेस ने UAPA कानून में संशोधन कर बिना जमानत के लंबी हिरासत को संभव बनाया है।
