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कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला: संसद में शिष्टता की कमी का आरोप

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद में उनके आचरण को लेकर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राहुल की भाषा असभ्य है और महिला सांसदों को असहजता महसूस होती है। कंगना ने राहुल को अपनी बहन प्रियंका गांधी से शिष्टता सीखने की सलाह दी। यह विवाद 12 मार्च को संसद में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उठ खड़ा हुआ, जब राहुल और अन्य विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष के आदेशों की अनदेखी की। 204 पूर्व अधिकारियों ने राहुल से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
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कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला: संसद में शिष्टता की कमी का आरोप

कंगना का बयान


नई दिल्ली: भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद में उनके आचरण को लेकर तीखा आरोप लगाया है। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी संसद में टपोरी की तरह आते हैं और उनकी भाषा 'ऐ, तू, तड़ाक' जैसी होती है, जिससे महिला सांसदों को असहजता महसूस होती है। उन्होंने राहुल को सलाह दी कि उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी से शिष्टता और अच्छे व्यवहार की शिक्षा लेनी चाहिए।


कंगना का तीखा बयान

बुधवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कंगना ने कहा, "राहुल गांधी संसद में टपोरी की तरह आते हैं और ऐ, तू, तड़ाक कर बातें करते हैं। उनके इस आचरण को देखकर महिला सांसद असहज हो जाती हैं। राहुल को अपनी बहन प्रियंका गांधी से शिष्टता और अच्छा व्यवहार सीखना चाहिए। प्रियंका कितना शालीन आचरण करती हैं। राहुल गांधी अपने आप में एक शर्म का विषय हैं।"




12 मार्च की घटना पर विवाद

यह बयान 12 मार्च को संसद भवन परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आया है। उस दिन राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष के आदेशों की अनदेखी करते हुए संसद की सीढ़ियों पर प्रदर्शन किया था।


इस घटना के बाद 200 से अधिक सेवानिवृत्त नौकरशाहों, पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजदूतों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने एक खुला पत्र जारी किया। पत्र में राहुल गांधी पर संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अध्यक्ष की अवहेलना करने और संसद को राजनीतिक तमाशे का मंच बनाने का आरोप लगाया गया है।


पूर्व अधिकारियों की मांग

खुले पत्र में कहा गया है कि राहुल गांधी को राष्ट्र से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट खाते हुए प्रदर्शन को पूरी तरह अशोभनीय बताया। पत्र में यह भी लिखा गया है कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और इसकी सीढ़ियां, गलियारे या परिसर किसी भी तरह के राजनीतिक नाटक या तमाशे के लिए नहीं हैं। इस पत्र को जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने समन्वित किया है, जिसमें 204 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।