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कनाडा में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों पर चिंता जताई गई

कनाडा की खुफिया सेवा ने एक नई रिपोर्ट में खालिस्तानी तत्वों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। इस रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुए बम हमले का भी जिक्र है। भारत ने कनाडा से इन तत्वों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में खटास आई है। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु और इसके पीछे के कारण।
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कनाडा में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों पर चिंता जताई गई

खालिस्तानी तत्वों का खतरा

कनाडा की खुफिया एजेंसी ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें खालिस्तानी समूहों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। यह रिपोर्ट कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) द्वारा 2025 के लिए किए गए आकलन पर आधारित है और इसे शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 पर हुए बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया गया है, जिसमें 329 लोगों की जान गई थी, जिसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है। हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि 2025 में कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों से संबंधित कोई हमला नहीं हुआ है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

एक समाचार स्रोत के अनुसार, रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी गतिविधियों में निरंतर संलिप्तता कनाडा और उसके हितों के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई है। कुछ खालिस्तानी समूह कनाडाई नागरिकों के साथ घनिष्ठ संबंध रखते हैं, जो अपने चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय संस्थानों का उपयोग करते हैं और भोले-भाले समुदाय के सदस्यों से धन जुटाते हैं, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है। यह सीएसआईएस द्वारा खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ जारी की गई दूसरी चेतावनी है। पिछले साल जून में भी सीएसआईएस ने कहा था कि ये तत्व कनाडा की धरती का उपयोग भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं।


भारत और कनाडा के संबंध

भारत ने बार-बार कनाडा में खालिस्तानी तत्वों की उपस्थिति को उजागर किया है और ओटावा से उनके खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की है। इस मुद्दे के कारण भारत-कनाडा संबंधों में खटास आई है, विशेषकर जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री बनने के बाद। हालांकि, मार्क कार्नी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की कोशिशें की जा रही हैं। इस साल मार्च में कार्नी से मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा को अपने देश में मौजूद खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद, कट्टरवाद और अतिवाद मानवता के लिए गंभीर चिंताएं हैं।