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कर्नाटक में कांग्रेस की नई रणनीति: शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना भाजपा के लिए चुनौती

कर्नाटक में कांग्रेस ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। भाजपा को अब अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना होगा, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय का समर्थन कांग्रेस के साथ एकजुट हो सकता है। जानें इस राजनीतिक बदलाव का क्या असर होगा और भाजपा को किन नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी।
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कर्नाटक में कांग्रेस की नई रणनीति: शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना भाजपा के लिए चुनौती

कर्नाटक में राजनीतिक बदलाव


भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद थी कि कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान का फायदा उठाकर वह चुनाव जीत जाएगी, जैसा कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुआ था। लेकिन कांग्रेस ने अपनी ताकत दिखाते हुए चुनाव से दो साल पहले ही डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दिया है। सिद्धारमैया के समर्थकों को भी समायोजित किया गया है, लेकिन अंदरूनी तनाव बना रहेगा। भाजपा को इस स्थिति का लाभ उठाने की आवश्यकता है।


भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। पहले भाजपा सिद्धारमैया के अनुसार अपनी योजना बना रही थी। यदि शिवकुमार मुख्यमंत्री नहीं बनते, तो भाजपा के लिए स्थिति सरल होती। लिंगायत समुदाय भाजपा के साथ होता और वोक्कालिगा समुदाय शिवकुमार के न होने पर जेडीएस के साथ जुड़ जाता। लेकिन अब भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।


डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख चेहरे हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से वोक्कालिगा वोट कांग्रेस के साथ एकजुट होगा, जिससे जेडीएस की स्थिति कमजोर होगी। इसके अलावा, अहिंदा समीकरण के तहत दलित और मुस्लिम वोट भी कांग्रेस के पक्ष में रहेंगे। भाजपा को अब पिछड़ी जातियों, विशेषकर कुरुबा समुदाय, में नाराजगी को दूर करने के लिए रणनीति बनानी होगी।