कर्नाटक में शिवाजी जयंती पर जुलूस के दौरान हिंसा: क्या है पूरा मामला?
बागलकोट में जुलूस के दौरान तनाव
कर्नाटक के बागलकोट में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर आयोजित जुलूस के दौरान अचानक दो समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया, जो जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। यह घटना उस समय हुई जब मराठा समाज के लोग पारंपरिक तरीके से जुलूस निकाल रहे थे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और बल प्रयोग कर हालात को नियंत्रित किया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
जुलूस की शुरुआत और पत्थरबाजी
जुलूस की शुरुआत अंबाभवानी मंदिर से हुई थी। जब यह जुलूस पंका मस्जिद के निकट पहुंचा, तभी कुछ अराजक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस घटना में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल सहित कई लोग घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, स्थिति पहले सामान्य थी, लेकिन अचानक हुई इस घटना ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
मुस्लिम समुदाय की आपत्ति
मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि जुलूस के दौरान मस्जिद के पास डीजे की आवाज तेज कर दी गई और नारेबाजी की गई, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। इस पर वहां मौजूद लोगों ने आपत्ति जताई। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ लोगों द्वारा चप्पल और पत्थर फेंके जाने से स्थिति और बिगड़ गई।
हिंदू कार्यकर्ताओं का आक्रोश
पत्थरबाजी के बाद कुछ हिंदू कार्यकर्ता भी आक्रोशित हो गए और मस्जिद के बाहर लगे ठेलों में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। आयोजकों ने इस घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थिति नियंत्रण में
घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों के घायल होने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल के नेतृत्व में टीम ने रात करीब 11 बजे तक हालात को पूरी तरह नियंत्रण में कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थिति सामान्य है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना में किसी की मौत की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
