Newzfatafatlogo

कर्नाटक में सीएम पद की खींचतान: सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मांगी मदद

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने प्रार्थना की शक्ति पर जोर दिया है। दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, और कैबिनेट विस्तार को लेकर भी मतभेद हैं। जानें इस राजनीतिक स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 | 
कर्नाटक में सीएम पद की खींचतान: सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मांगी मदद

सीएम पद को लेकर स्थिति स्पष्ट करें राहुल गांधी: सिद्धारमैया


कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अब राहुल गांधी से इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिद्धारमैया ने कहा कि वह कैबिनेट विस्तार के इच्छुक हैं, लेकिन हर दिन सीएम पद को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में राहुल गांधी को इस मामले में स्पष्टता लानी चाहिए।


डीके शिवकुमार की राहुल गांधी से व्यक्तिगत चर्चा

इस बीच, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भले ही प्रयास सफल न हों, लेकिन प्रार्थना कभी विफल नहीं होती। उनकी इस पोस्ट को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। दरअसल, राहुल गांधी 13 जनवरी को मैसुरु में थे, जहां एयरपोर्ट पर शिवकुमार ने उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत की।


सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनाव

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। शिवकुमार के समर्थक विधायकों का कहना है कि 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने के समय 2.5-2.5 साल की डील हुई थी, जबकि सिद्धारमैया के समर्थक इसे नकारते हैं।


सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का कार्यकाल 20 नवंबर 2025 को समाप्त होगा। तब से सत्ता संतुलन को लेकर बयानबाजी जारी है। कुछ विधायक, जो शिवकुमार के समर्थक माने जाते हैं, दिल्ली जाकर खड़गे से भी मिले थे। सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर निर्णय ले।


सिद्धारमैया का कार्यकाल और शिवकुमार की संभावनाएं

पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि हाई कमान कैबिनेट विस्तार को मंजूरी देता है, तो इससे सिद्धारमैया के पूरे कार्यकाल (5 साल) तक बने रहने का संकेत मिल सकता है, जो शिवकुमार की सीएम बनने की संभावनाओं को कम कर देगा।