Newzfatafatlogo

कर्नाटक सरकार ने बच्चों के लिए डिजिटल उपयोग नीति का मसौदा पेश किया

कर्नाटक सरकार ने बच्चों के लिए एक नई डिजिटल उपयोग नीति का मसौदा पेश किया है, जिसका उद्देश्य मोबाइल और सोशल मीडिया की लत को नियंत्रित करना है। इस नीति में शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट पर रोक, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों में इंटरनेट की लत बढ़ रही है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जानें इस नीति के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में।
 | 
कर्नाटक सरकार ने बच्चों के लिए डिजिटल उपयोग नीति का मसौदा पेश किया

बेंगलुरु में नई डिजिटल नीति की घोषणा

बेंगलुरु। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य ने 'विद्यार्थियों के बीच जिम्मेदार डिजिटल उपयोग नीति' का मसौदा प्रस्तुत किया है, जिसे 'डिजिटल डिटॉक्स' योजना के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस नई नीति के प्रमुख बिंदुओं के बारे में:


शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट पर रोक

इस नीति के तहत, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शाम 7 बजे के बाद मोबाइल डेटा अपने आप बंद करने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को रात के समय सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से दूर रखना है।


सोशल मीडिया पर प्रतिबंध

सरकार ने 16 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। उम्र की पुष्टि के लिए 'आधार-आधारित साइन-अप' अनिवार्य करने की योजना है ताकि बच्चे अपनी उम्र छिपाकर अकाउंट न बना सकें।


स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश

स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे होमवर्क या सूचनाओं के लिए WhatsApp का उपयोग बंद करें और पारंपरिक डायरी प्रणाली पर लौटें। इसके अलावा, हर स्कूल में एक डिजिटल वेलनेस कमेटी बनाई जाएगी जो छात्रों के डिजिटल व्यवहार की निगरानी करेगी।


स्क्रीन टाइम और टेक कर्फ्यू

मनोरंजक स्क्रीन टाइम को दिन में अधिकतम 1 घंटे तक सीमित करने की सिफारिश की गई है। बेडरूम और डाइनिंग टेबल को 'डिजिटल फ्री जोन' घोषित करने का सुझाव दिया गया है ताकि परिवार के साथ समय बिताने को बढ़ावा मिले।


NIMHANS का सहयोग

यह नीति नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) के सहयोग से तैयार की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में इंटरनेट की लत लगभग 25 फीसदी तक पहुंच गई है, जिससे मानसिक तनाव, अनिद्रा और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।


वर्तमान स्थिति

यह अभी एक 'मसौदा' है। सरकार ने इस पर जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।