कश्मीर में खामेनेई की मौत पर भड़के प्रदर्शन: अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा
कश्मीर में प्रदर्शन की लहर
कश्मीर: ईरान के प्रमुख नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमलों में हुई मौत का प्रभाव कश्मीर घाटी में भी महसूस किया जा रहा है। शनिवार को विभिन्न क्षेत्रों में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई की बड़ी तस्वीरें और पोस्टर थाम रखे थे, और वे “खामेनेई जिंदाबाद” तथा “अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते हुए अपना विरोध व्यक्त कर रहे थे। घाटी के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
धार्मिक और राजनीतिक भावनाएं
कश्मीर में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाएं भी शामिल हैं। खामेनेई को कई लोग इस्लामी एकता और फिलिस्तीन के समर्थन का प्रतीक मानते हैं। विशेष रूप से शिया समुदाय और ईरान समर्थक समूहों में उनकी छवि एक प्रभावशाली धार्मिक नेता की रही है। इसीलिए, उनकी मृत्यु की खबर ने गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की। ईरान ने अतीत में कश्मीर मुद्दे पर बयान दिए हैं, जिससे घाटी के कुछ वर्गों में उसके प्रति सहानुभूति बनी रही। जब उनके निधन की सूचना आई, तो इसे कई लोगों ने अपने धार्मिक नेतृत्व पर हमले के रूप में देखा।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी पर प्रतिक्रिया
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का नाम दिया गया है। स्थानीय स्तर पर कई प्रदर्शनकारी इसे इस्लाम, विशेषकर शिया समुदाय के खिलाफ एक कदम मानते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस ऑपरेशन में ईरान के 40 से अधिक शीर्ष नेता और वरिष्ठ कमांडर मारे गए, जिससे मध्य पूर्व में पहले से चल रहे तनाव में और वृद्धि हुई है।
ईरान पर बड़ा हमला
शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर एक बड़ा हमला किया। इस कार्रवाई में खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है।
कश्मीर की राजनीति पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि घाटी में हो रहे ये प्रदर्शन भविष्य में स्थानीय राजनीति और सामाजिक माहौल पर प्रभाव डाल सकते हैं। खामेनेई की मृत्यु की खबर ने कश्मीर में कई लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है। हालांकि, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
