कांग्रेस का नारी शक्ति वंदन कानून पर नया रुख
कांग्रेस का नया दृष्टिकोण
सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून के पारित होने के समय कांग्रेस के नेताओं ने जो बातें नहीं की थीं, अब वे उन पर चर्चा करने लगे हैं। जब सरकार ने इस कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाया, तो विपक्ष ने एकजुट होकर इसे असफल बना दिया। इस चर्चा के दौरान, कांग्रेस के कई नेताओं और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरक्षण के भीतर आरक्षण का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि यदि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का लाभ केवल कुछ चुनिंदा और पहले से सशक्त महिलाओं को ही मिलेगा।
कांग्रेस में मंथन
कांग्रेस में इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। पार्टी के ओबीसी नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इसे सिद्धांत के रूप में अपनाया जाए और हर मंच पर इसकी मांग की जाए। हालांकि, यह चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन कानून अब लागू हो चुका है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो जनगणना के बाद परिसीमन होगा, जिसके आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और उनमें से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। कांग्रेस को इस स्थिति का भान है। इसके बावजूद, पार्टी हर जगह यह स्पष्ट करेगी कि उसने महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया, बल्कि परिसीमन का विरोध किया था। इसके लिए कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनों का आयोजन शुरू कर दिया है।
