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कांग्रेस को चुनावी मुकाबले में तृणमूल और आम आदमी पार्टी से चुनौती

कांग्रेस पार्टी को विभिन्न राज्यों में भाजपा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियों से भी चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कांग्रेस को नुकसान पहुँचाने के लिए सक्रिय हैं। असम में सुष्मिता देब की अध्यक्षता में तृणमूल कांग्रेस लगभग 50 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जानें कैसे ये दल कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं और भाजपा को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
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कांग्रेस को चुनावी मुकाबले में तृणमूल और आम आदमी पार्टी से चुनौती

राजनीतिक परिदृश्य

कांग्रेस पार्टी को कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों से भी मुकाबला करना पड़ता है, जो भाजपा के खिलाफ हैं या उससे दूरी बनाने की कोशिश कर रही हैं। इनमें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी प्रमुख हैं। ये दल कई राज्यों में चुनावों में केवल कांग्रेस को नुकसान पहुँचाने के लिए सक्रिय हैं। वर्तमान में जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि असम में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। यहां ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार कांग्रेस को नुकसान पहुँचाने के लिए चुनावी मैदान में हैं। भाजपा से दूरी दिखाने वाली उनकी सहयोगी एनपीपी भी असम में चुनाव लड़ रही है। एनपीपी के नेता कॉनरेड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री हैं।


सुष्मिता देब की नियुक्ति

ममता बनर्जी ने महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सुष्मिता देब को असम का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद भी हैं। असम में ममता बनर्जी की पार्टी सुष्मिता देब के नेतृत्व में लगभग 50 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उनके पिता संतोष मोहन देब असम कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं। जहां भी तृणमूल चुनाव में भाग ले रही है, वहां कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। कॉनरेड संगमा की पार्टी एनपीपी भी 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोनों पार्टियों को नुकसान पहुँचा सकती है। बोडोलैंड और जनजातीय क्षेत्रों में मिलने वाले वोट भाजपा को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं, जबकि ईसाई वोटों में कांग्रेस को हानि हो सकती है।