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कांग्रेस ने अमेरिकी तेल छूट पर केंद्र सरकार को घेरा

कांग्रेस ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे 'अमेरिकी ब्लैकमेल' और संप्रभुता पर हमला बताया है। जयराम रमेश और मनीष तिवारी जैसे नेताओं ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की मंजूरी की आवश्यकता है। जानें इस विवाद के पीछे की वजह और कांग्रेस की तीखी आलोचना के बारे में।
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कांग्रेस ने अमेरिकी तेल छूट पर केंद्र सरकार को घेरा

कांग्रेस का आरोप


कांग्रेस ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस सांसदों ने इसे 'अमेरिकी ब्लैकमेल' और देश की संप्रभुता पर हमला करार दिया है। अमेरिकी कोषाध्यक्ष स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है, क्योंकि ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत के 40 प्रतिशत तेल आयात प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भारत 'बनाना रिपब्लिक' बन गया है। यह विवाद फरवरी में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद बढ़े तेल दामों से जुड़ा हुआ है।


कांग्रेस की तीखी आलोचना

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप प्रशासन ने दिल्ली को रूसी तेल खरीदने की 'अनुमति' देकर अमेरिकी ब्लैकमेल की शुरुआत की है। मनीष तिवारी ने अमेरिकी निर्णय की भाषा को नवसाम्राज्यवादी अहंकार बताया और पूछा कि क्या भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की मंजूरी की आवश्यकता है। कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार की चुप्पी से देश की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।


अमेरिकी फैसले का कारण

अमेरिकी कोषाध्यक्ष स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह 30 दिन की छूट समुद्र में फंसे रूसी तेल के लिए है। इसका उद्देश्य ईरान के 'वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने' के प्रयासों को रोकना है। बेसेंट ने यह भी कहा कि यह एक छोटी अवधि की राहत है और रूस को अधिक लाभ नहीं पहुंचाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।


नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने भारत की स्वतंत्रता को अमेरिका के सामने गिरवी रख दिया है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान-रूस व्यापार पर निर्देशों का उल्लेख किया। सुरजेवाला ने सवाल किया कि क्या दिल्ली में कोई सरकार है। कांग्रेस ने इसे बिडेन युग की कूटनीति से ट्रंप की दबाव वाली रणनीति में बदलाव बताया।


सरकार की चुप्पी पर सवाल

केंद्र सरकार ने अभी तक कांग्रेस के आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार की खामोशी असामान्य है, जबकि वह आमतौर पर हर मुद्दे पर बोलती है। यह घटना फरवरी में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों से उपजे तेल संकट से संबंधित है। विपक्ष इसे राष्ट्रीय संप्रभुता पर धब्बा मान रहा है।