कांग्रेस ने केंद्र पर जाति जनगणना से पीछे हटने का आरोप लगाया
कांग्रेस का आरोप
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। पार्टी के महासचिव और संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण कानून में बदलाव के माध्यम से सरकार देश को गुमराह कर रही है।
सरकार की मंशा पर सवाल
जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सरकार अनुच्छेद 334 (ए) में संशोधन की बात कर रही है। यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के परिणाम आने में समय लगेगा। लेकिन बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से कम समय में जाति सर्वे पूरा किया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार का छिपा हुआ एजेंडा है और असल में जाति जनगणना नहीं कराना चाहती।
परिसीमन और महिला आरक्षण
केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण को जनगणना से अलग कर रही है और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। इसके लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का सत्र बुलाया गया है। जयराम रमेश ने इस पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
टाइमलाइन का विवरण
रमेश ने पूरी टाइमलाइन बताते हुए कहा, '20 जुलाई 2021 को सरकार ने लोकसभा में बताया था कि एससी और एसटी के अलावा जातिवार जनगणना नहीं कराई जाएगी। 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में भी यही रुख रखा गया था। 28 अप्रैल 2024 को एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना के समर्थन को अर्बन नक्सली सोच बताया था। इसके बाद 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने अगली जनगणना में जाति गणना शामिल करने की घोषणा की।' उन्होंने कहा, '30 मार्च 2026 को जनगणना आयुक्त ने कहा था कि 2027 की जनगणना के कई आंकड़े उसी साल जारी हो जाएंगे, क्योंकि पूरी प्रक्रिया डिजिटल है। इसके बावजूद अब नतीजों में देरी की बात कही जा रही है। सरकार अब उस प्रावधान में बदलाव करना चाहती है, जिसे संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था।'
