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कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग: भाजपा को मिला फायदा

हाल ही में बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे भाजपा को फायदा हुआ है। हरियाणा में कांग्रेस को अपेक्षित वोट नहीं मिले, जिससे यह सवाल उठता है कि विधायकों को किस प्रकार के प्रलोभन दिए गए। क्या यह केवल पैसे का खेल है या इसके पीछे और भी कारण हैं? जानें इस मामले की गहराई में जाकर क्या चल रहा है।
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कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग: भाजपा को मिला फायदा

कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग का मामला

बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की या अपने वोटों को अवैध बनाने के विभिन्न तरीकों का सहारा लिया, जिससे भारतीय जनता पार्टी को लाभ हुआ। हरियाणा में भाजपा ने कोई सीट नहीं जीती, लेकिन कांग्रेस, जो 37 विधायकों के साथ थी, को केवल 28 वोट मिले। इसका अर्थ है कि नौ विधायक अब कांग्रेस से अलग हो चुके हैं। इनमें से एक विधायक के पति ने भाजपा की खुलकर प्रशंसा की है।


राज्यसभा चुनाव के बाद से इस बात की चर्चा है कि इन विधायकों को किस प्रकार के प्रलोभन दिए गए होंगे, जिससे उन्होंने अपना पक्ष बदला। यह सवाल बिहार, ओडिशा और हरियाणा में उठ रहा है। लोगों का मानना है कि विधायकों को पैसे दिए गए होंगे। पिछले कुछ वर्षों में भारत का लोकतंत्र किस प्रकार के मुद्दों से प्रभावित हो रहा है, यह आम जनता भी समझ रही है।


दूसरी संभावना यह है कि सरकार ने 'स्टिक एंड कैरेट' नीति अपनाई है। यानी, पैसे के प्रलोभन के साथ-साथ किसी प्रकार का भय भी दिखाया गया है। उदाहरण के लिए, बिहार में एक विधायक को 19 साल पुराने हत्या के मामले की फाइल के बारे में चेतावनी दी गई थी। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण मुद्दा परिसीमन का है। विधायकों को आश्वासन दिया गया है कि उनके चुनाव क्षेत्र का ध्यान रखा जाएगा, ताकि उनकी जाति के वोट वाले क्षेत्र को काटकर दूसरे क्षेत्र में न भेजा जाए। यह एक ऐसा मामला है, जिससे सभी विधायकों में चिंता है।