कांशीराम को भारत रत्न देने की राहुल गांधी की अपील: क्या होगी सरकार की प्रतिक्रिया?
कांशीराम की जयंती पर उठी मांग
नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती के अवसर पर राजनीतिक चर्चा में एक नया मोड़ आया है। कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।
कांशीराम के योगदान की सराहना
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र में लिखा है कि कांशीराम जी ने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का कार्य किया। उन्होंने बहुजनों, दलितों और गरीबों में जागरूकता फैलाने का काम किया और लोगों को बताया कि उनका वोट उनकी शक्ति है। उनके प्रयासों से कई लोग, जो पहले राजनीति से दूर थे, अब इसे न्याय और समानता का माध्यम मानते हैं।
पत्र में राहुल ने यह भी उल्लेख किया कि संविधान सभी को समानता, सम्मान और हिस्सेदारी का आश्वासन देता है। कांशीराम जी ने अपने जीवन में समाज के कमजोर वर्गों के लिए इन वादों को साकार करने की कोशिश की, जिससे लोकतंत्र मजबूत हुआ और राजनीति अधिक समावेशी बनी।
Lok Sabha LoP Rahul Gandhi writes to Prime Minister Narendra Modi, requesting that BSP Founder Kanshi Ram be awarded the Bharat Ratna posthumously. pic.twitter.com/ChGo40ZugK
— News Media (@NewsMedia) March 15, 2026
लखनऊ में भी उठी मांग
राहुल गांधी ने बताया कि कई वर्षों से दलित बुद्धिजीवी, नेता और कार्यकर्ता इस मांग को उठा रहे हैं। हाल ही में लखनऊ में एक कार्यक्रम में भी इस मांग को जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने इसे जनता की भावना बताया।
उन्होंने कहा कि कांशीराम को भारत रत्न देना उनके योगदान को उचित सम्मान प्रदान करेगा और यह उन करोड़ों लोगों की आशा का सम्मान होगा, जो उन्हें सशक्तिकरण का प्रतीक मानते हैं।
बसपा प्रमुख का श्रद्धांजलि
कांशीराम की जयंती पर बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर उनके विचारों को याद करने और समाज में समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाने का है।
राहुल गांधी की यह मांग दलित और पिछड़े वर्ग के बीच राजनीतिक जागरूकता को फिर से उजागर करती है। कांशीराम जी के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने की इच्छा कई लोगों की लंबे समय से रही है। अब यह देखना है कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।
