कुवैत में ईरानी फोर्स का घुसपैठ, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में फिर से युद्ध की आहट
मिडिल ईस्ट में संघर्ष एक बार फिर से शुरू हो गया है। हाल ही में कुवैत में ईरान की फोर्स के घुसने की खबरें आई हैं। कुवैत सरकार ने आरोप लगाया है कि ईरान ने उनके एक द्वीप पर घुसपैठ करने की कोशिश की। इस दौरान ईरानी और कुवैती सेना के बीच गोलीबारी की भी घटनाएं हुई हैं। कुवैत का कहना है कि आईआरजीसी से जुड़े लड़ाके बूबियन आइलैंड पर ग्राउंड ऑपरेशन करने का प्रयास कर रहे हैं। यह आरोप उस समय लगाया गया है जब ईरान और कुवैत के बीच झड़पों की खबरें आ रही थीं। पिछले 40 दिनों में ईरान ने कुवैत पर 1500 से अधिक हमले किए थे। हालांकि, ईरान ने इस घटना पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
बूबियन आइलैंड का महत्व
बूबियन आइलैंड कुवैत का सबसे बड़ा द्वीप है, जो फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह द्वीप कुवैत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे अमेरिका का अस्थायी बेस भी माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान यूएई, कुवैत और बहरीन के खिलाफ सक्रिय हो गया है। इन तीनों देशों को अमेरिका और इजरायल का करीबी सहयोगी माना जाता है। तेहरान टाइम्स के अनुसार, ईरान ने यूएई को सबक सिखाने की आवश्यकता महसूस की है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिरोध अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां परमाणु युद्ध की धमकियां सुनाई देने लगी हैं। हाल ही में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर फिर से सैन्य हमला किया गया, तो वह अपने यूरेनियम संवर्धन की दर को 90% तक बढ़ा देगा। यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए कूटनीतिक प्रस्तावों को ईरान ने ठुकरा दिया। ईरान की ओर से आए तीखे बयानों ने वाशिंगटन को नाराज कर दिया है।
परमाणु हथियार बनाने की धमकी
ईरान का यूरेनियम संवर्धन स्तर नागरिक उद्देश्यों तक सीमित होने का दावा किया जाता रहा है, लेकिन 90% की बात करना सीधे तौर पर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की धमकी है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान की सुरक्षा को खतरा होता है, तो वह यूरेनियम संवर्धन को 90% तक ले जाएगा। यह कदम दर्शाता है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु क्षमता को अंतिम हथियार के रूप में देख रहा है।
