केजरीवाल ने पंजाब में राजनीति की नई परिभाषा दी
पारदर्शिता के साथ हुए पंचायत चुनाव
लुधियाना से मिली जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने पंचायत चुनावों में 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत को ईमानदार शासन का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में स्थानीय इकाइयों के चुनाव अब तक की सबसे पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुए हैं, जिसमें कोई भी वोट नहीं बदला गया।
केजरीवाल ने अतीत की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले सत्ताधारी पार्टी पंचायत चुनावों को धांधली और शक्ति के बल पर जीतती थी। उन्होंने 2013 और 2017 के चुनावों का जिक्र किया, जब चुनाव एक साल बाद हुए थे और बूथ कैप्चरिंग तथा गुंडागर्दी की घटनाएं आम थीं।
पार्टी की लोकप्रियता का कारण
उन्होंने कहा कि अब उनकी सरकार के चार साल पूरे होने के बाद चुनाव बिना किसी जबरदस्ती के हुए हैं। परिणामों में देखा गया कि 600 से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों ने 100 से कम वोटों से जीत हासिल की। इनमें से 350 से अधिक सीटें विपक्ष ने जीती हैं। कई सीटों पर कांग्रेस या अकाली दल के उम्मीदवार केवल एक वोट से जीते हैं।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि अगर वे सत्ता का दुरुपयोग करना चाहते, तो यह आसान था। उन्होंने कहा कि वे जबरदस्ती करने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं। उनका उद्देश्य राजनीति को साफ करना और गुंडागर्दी को समाप्त करना है।
नशे के खिलाफ कार्रवाई
पंजाब में नशे की समस्या पर बात करते हुए केजरीवाल ने कहा कि नशा बेचने वाले लोग विभिन्न पार्टियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे गैंगस्टरों को टिकट देते हैं और अपराध में शामिल होते हैं। केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस सिस्टम को साफ करने के लिए आई है और उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।
