कॉकरोच जनता पार्टी: क्या बनेगी यह नई राजनीतिक ताकत?
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब मुख्यधारा की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इस पार्टी का समर्थन किया है और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके को गठबंधन का सुझाव दिया है।
उदित राज का महत्वपूर्ण सुझाव
कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने अभिजीत दीपके को सलाह दी है कि कॉकरोच जनता पार्टी को अकेले नहीं चलना चाहिए। उनका मानना है कि यह पार्टी, जो सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से को दर्शाती है, को बड़े राजनीतिक दलों के साथ जुड़कर आगे बढ़ना चाहिए। उदित राज का कहना है कि इस आंदोलन की ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी का सहयोग आवश्यक है।
राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने का सुझाव
उदित राज ने यह भी कहा कि केवल राहुल गांधी ही इस आंदोलन को संविधान की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई में बदल सकते हैं। उन्होंने अभिजीत दीपके को याद दिलाया कि वे अंबेडकरवादी हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि भाजपा-आरएसएस को लोकतांत्रिक तरीके से हराने की असली ताकत किसके पास है। उदित राज को उम्मीद है कि कॉकरोच जनता पार्टी और राहुल गांधी का गठबंधन मिलकर केंद्र की भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर कर सकता है।
TMC का समर्थन
कांग्रेस से पहले, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी कॉकरोच जनता पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने इस ऑनलाइन मुहिम को पूरा समर्थन देने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि TMC एक अच्छी लड़ाई लड़ने पर जोर दे रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत
अभिजीत दीपके द्वारा स्थापित कॉकरोच जनता पार्टी 16 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हुई। यह पार्टी प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की विवादास्पद टिप्पणी के बाद शुरू हुई, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई थी। पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट को बाद में बंद कर दिया गया।
क्या बनेगी राजनीतिक ताकत?
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में एक औपचारिक राजनीतिक पार्टी बनेगी या नहीं, लेकिन कांग्रेस और TMC जैसे दलों का समर्थन मिलने से इस मुहिम की चर्चा बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस सोशल मीडिया से शुरू हुए गुस्से को सही नेतृत्व मिला, तो यह एक बड़ा आंदोलन बन सकता है।
